श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर ही तहखाने के विग्रहों का पूजन होगा। व्यासजी के तहखाने में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक ही रोटेशन के आधार पर पूजा, राग-भोग और आरती कराएंगे। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से इसके लिए सारे इंतजाम कर दिए गए हैं। मंगला आरती से शयन आरती तक होने वाली नियमित पूजन की शुरूआत गुरुवार से हुई। तहखाने का नामकरण हो गया है। काशी विद्वत परिषद ने इसका नाम ज्ञान ताल गृह रखा है। उन्होंने भीतर अखंड रामायण शुरु कर दी है।
गुरुवार की शाम को व्यासजी के तहखाने को आम श्रद्धालुओं के लिए भी खोल दिया गया। अपराह्न की आरती के बाद शाम चार बजे से बैरिकेडिंग के बाहर से श्रद्धालुओं ने तहखाने में रखे विग्रहों के दर्शन किए। पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयकारे से गूंजता रहा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर व्यासजी के तहखाने में पूजन होगा। मंदिर की पूजा पद्धति के अनुसार ही राग-भोग, शृंगार और आयोजन होंगे। फिलहाल मंदिर के पुजारियों को रोटेशन के आधार पर तैनात किया गया है।
काशी विश्वनाथ की पूजा और आरती के बाद अर्चक तहखाने में पूजन करेंगे। जरूरत पड़ी तो तहखाने के लिए नियमित पुजारियों को भी नियुक्त किया जाएगा। मंगला आरती के साथ ही इसकी शुरूआत हो गई है। काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा के मुताबिक न्यायालय ने तहखाने में मौजूद विग्रह के राग-भोग का आदेश किया है।
उनका राग-भोग छोटे बच्चे की तरह होता है।
वादी ने यही दलील दी कि जब कोर्ट ने राग-भोग की इजाजत दे दी है तो वह तुरंत होना चाहिए। शाम को तहखाने का झांकी दर्शन भी आरंभ हो गया। न्यास अध्यक्ष ने कहा कि जिस तरह से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भोग, राग और शृंगार होता है उसी तरह से यहां के विग्रहों की भी पूजा अर्चना होगी।