इधर, कोर्ट से नियुक्त विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने बताया कि जो वस्तुस्थिति पाई गई है, वही रिपोर्ट में दिखाया जाएगा। न तो किसी के पक्ष में साक्ष्य बढ़ाया जाएगा और न ही घटाया जाएगा। बताया कि सर्वे के दौरान दोनों पक्षों ने शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सहयोग प्रदान किया।
सर्वे टीम में शामिल एक सदस्य ने बताया कि परिसर के एक हिस्से में जमा पानी को निकलवाया गया। सफाई के बाद पत्थर के नीचे दबा एक शिवलिंग मिला। भूतल से इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 20 फुट बताई जा रही है। उस स्थान को मुस्लिम पक्ष फव्वारा बता रहा है। यह वही स्थान है जहां वजू किया जाता है। काफी दुर्व्यस्था और दुर्दशा के बीच यह शिवलिंग मिला है।
इस शिवलिंग के मिलने से वादी और हिंदू पक्ष के दावे को बल मिला है। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि शिवलिंग नंदी महराज के ठीक सामने मिला। हमलोगों ने इस स्थान को सील करने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया। जिस पर कोर्ट ने उसे सील करने का आदेश दिया।
डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि पूर्व में शिवलिंग का आकार परिवर्तित करने का प्रयास किया गया था। नंदी के ठीक सामने शिवलिंग मिला है ऐसे में पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग को बल मिला है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि ऑर्किलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से रिपोर्ट की पुष्टि के लिए जांच आवश्यक हो गई है। ज्ञानवापी परिसर में जहां सफेदी लगाई गई है और जहां फव्वारा होने की बात कही जा रही है वो चारों तरफ से बंद है। सबकी जांच पुरातत्विक सर्वेक्षण से कराना आवश्यक है। सर्वे रिपोर्ट की स्पष्ट आख्या कोर्ट मंगवाए।
हिंदू पक्ष का दावा है कि नंदी महाराज के सामने जो तहखाना है, उसी में अंदर मस्जिद के बीचों-बीच आज भी शिवलिंग दबा है। इस विशालकाय शिवलिंग का रंग हरा है। वहीं अरघा भी काफी बड़ा है। विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में जिसे तहखाना कहा जा रहा है वह असलियत में मंदिर मंडपम है। आगे कहा कि जो लोग भी ज्ञानवापी में तहखानों की बात कर रहे हैं, वे सभी मंडपम हैं। इन्हें तहखाना के बजाय मंडपम कहें तो बेहतर होगा।