उन्होंने कहा, पक्षकार गण ने इसपर बहस ही नहीं की थी और आदेश हो गया। 11 अक्तूबर 2019 को कोर्ट ने सिर्फ वादमित्र नियुक्त किया न कि वादी बनाया है। ये जनहित संबंधित वाद है। जो हिंदू जनमानस से जुड़ा हुआ। जिस प्राइवेट ट्रस्ट के माध्यम से इस मुकदमे को पैरवी करने की हकदार के दावा किया जा रही वो कपोल कल्पित है। उनके इस अर्जी पर विरोध करने के विधिक अधिकार भी नहीं है। इस लिए बेटियों के ओर वे दाखिल आदेश में संशोधित करने की अर्जी को स्वीकार करने की गुहार लगाई।
वहीं, पिछली तिथि पर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से रईस अहमद अंसारी ने बहस की थी। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कोर्ट में कहा था कि इस मामले में अवर न्यायालय से आदेश हो चुका है। हालांकि बेटियों की ओर से बार-बार अपनी बहस में ये कहा जा रहा कि वाद मित्र ने हरिहर पांडेय के धोखे में रख कर अपने को इस मामले में वाद मित्र नियुक्त करवाए है। जबकि कोर्ट ने सारे प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2019 में उसे न्यायालय ने वाद मित्र नियुक्त किया गया था।