वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि कोर्ट से ज्ञानवापी परिसर को बाबा का मंदिर घोषित करने, उसे हिंदुओं को सौंपने और वर्तमान ढांचा हटाकर उस पर मंदिर बनवाने के लिए वाद दाखिल किया गया है। वाद में सुनवाई पर इतना विलंब होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए पॉलिटिकल प्रेशर जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जिस तरह राम मंदिर की लड़ाई में संगठनात्मक शक्तियां आगे आकर न्याय हासिल की। वैसे ही इस मामले में संगठनात्मक शक्तियां आगे आएंगी, तभी न्याय मिल सकेगा। कहा कि अन्य सरकारों ने मामले को हल करने में कोई रुचि नहीं ली, जिसके चलते न्याय नहीं मिल पाया। साथ ही हिंदू पक्ष में भी कुछ ऐसे लोग हैं, जिनसे जूझना पड़ रहा है। सर्वे रिपोर्ट सामने आने पर अयोध्या की तरह बाबा विश्वनाथ का भी मामला साक्ष्यों के आधार पर निर्णीत हो जाएगा।