ज्ञानवापी परिसर के बाहर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता
- फोटो : अमर उजाला
इसे लेकर गुरुवार को चार अन्य वादिनी महिलाओं के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले में अदालत के बाहर कोई भी समझौता सीपीसी के तहत कानूनी तौर पर संभव नहीं है। बातचीत के प्रस्ताव की कोई कानूनी अहमियत नहीं है। सीपीसी में साफ कहा गया है कि जब तक सभी पक्ष राजी नहीं होते हैं, तब तक कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
ोउन्होंने कहा कि देश और समाज से जुड़े मामलों में जहां पूरे समाज को शामिल करते हुए प्रतिनिधि वाद दायर किया जाता है, वहां पर कोई व्यक्ति या पक्ष अकेले समझौता करना भी चाहे तो भी नहीं कर सकता है। इसलिए सीपीसी के तहत अदालत से बाहर समझौते की कोई भी पहल संभव नहीं है, क्योंकि यह कानूनी रूप से संभव नहीं है।
विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हमारा कोई भी पक्ष या क्लाइंट अदालत के बाहर समझौते के लिए तैयार नहीं है। वे इस तरह के किसी समझौते के लिए इच्छुक नहीं है क्योंकि ऐसा करने के लिए पक्ष को अपने कुछ अधिकार छोड़ने होंगे और वे एक इंच भी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर यह समझौता होगा कैसे? समझौता तभी होता है जब आप अपने कुछ अधिकार छोड़ देते हैं और दूसरा व्यक्ति अपने कुछ। यहां हम बैरिकेड के अंदर की एक इंच जमीन भी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हम चाहते हैं कि पूरा क्षेत्र बैरिकेड के अंदर हो।
विष्णु शंकर जैन ने कहा कि जिस तरह से उन्होंने एक मंदिर को मस्जिद के रूप में इस्तेमाल किया है, उसके लिए मुस्लिम पक्ष को माफी मांगनी चाहिए। इसलिए समझौते का कोई सवाल ही नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद के वुजूखाने को छोड़कर पूरे परिसर का चार अगस्त से वैज्ञानिक सर्वे शुरू है। एएसआई को यह जांचना है कि क्या मस्जिद का निर्माण पूर्व में किए गए हिंदू मंदिर के ऊपर किया गया है।