मैदागिन-गोदौलिया मार्ग पर पुलिस का पहरा
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शनिवार को परिसर के पश्चिमी द्वार के तहखाने में कार्रवाई दोपहर 12 बजे तक चली। तहखाने के अंदर की बनावट, धार्मिक चिह्न, कलाकृतियों और खंभों की वीडियोग्राफी भी करवाई गई। सर्वे टीम ने सभी पहलुओं की गहन जांच की। दो कमरों के ताले तो आसानी से खुल गए, लेकिन तीसरे का ताला नहीं खुलने के कारण उसे तोड़ना पड़ा। चौथे कमरे में दरवाजा नहीं है। दावा है कि चार जनवरी 1993 को तत्कालीन डीएम सौरभ चंद्र ने नीचे के तीनों कमरों पर ताले लगवा दिए थे।
कार्रवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष का पूरा सहयोग मिला। तहखाने के अंदर की बनावट, धार्मिक चिह्न, कलाकृतियों और खंभों की वीडियोग्राफी भी करवाई। चार घंटे तक चलीकार्यवाही के बाद टीम के सदस्य एक-एक करके 12 बजे से पहले ही मस्जिद परिसर से बाहर निकल आए।
इससे पहले 6 मई को सर्वे की कार्यवाही शुरू हुई थी। विरोध व हंगामे के बीच सात मई को कार्यवाही रुक गई थी। 12 मई को अदालत ने फिर से सर्वे का आदेश दिया। सर्वे की रिपोर्ट 17 मई को अदालत में पेश की जाएगी।
अदालत ने कमीशन की कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 17 मई की तिथि निर्धारित की है। आज सर्वे के बाद आगे की रणनीति पर मंथन किया जाएगा। 17 मई को विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह, अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह संयुक्त रिपोर्ट न्यायालय को सौंपेंगे। यदि टीम को लगता है कि कमीशन के लिए और समय की आवश्यकता है तो वह न्यायालय से अगली तिथि पर रिपोर्ट पेश करने की अनुमति भी मांग सकती है।
याचिका दाखिल करने वाली महिलाएं
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ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन पूजन और परिसर में स्थित अन्य विग्रहों को सरंक्षित करने के लिए याचिकाकर्ता राखी सिंह, मंजू व्यास, सीता साहू, रेखा पाठक और लक्ष्मी देवी ने 18 अगस्त 2021 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन के यहां याचिका दाखिल की थी। इस मामले में 26 अप्रैल को कोर्ट द्वारा परिसर का सर्वे का आदेश जारी कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अजय कुमार को इसके लिए वकील कमिश्नर नियुक्त किया।
6 मई को पहली बार टीम ने सर्वे शुरू किया और सात मई को सर्वे टीम का मुस्लिम पक्ष के लोगों ने विरोध किया। न्यायालय में मुस्लिम पक्ष ने वकील कमिश्नर को बदलने की मांग की। हालांकि न्यायालय ने इस प्रति आपत्ति को खारिज करते हुए 12 मई को आदेश जारी किया कि अजय कुमार के साथ विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह को नियुक्त किया था। न्यायालय ने आदेश भी दिया है कि ताला खोलकर या तोड़कर कमीशन की कार्रवाई निर्बाध पूरी कराई जाए। इसमें बाधा डालने वालों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई का भी आदेश दिया गया है।