यूपी बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि ज्ञानवापी मामले में धर्मस्थल कानून विधेयक 1991 लागू नहीं होता है, क्योंकि यहां कानून आने के पहले से और बाद में भी शृंगार गौरी का पूजन और दर्शन होता रहा। हिंदू धर्मावलंबियों को पूजा-पाठ का जन्मसिद्ध अधिकार है। ऑर्डर 7 रूल 11 मेंटनेबुल नहीं होगा। कोर्ट आदेश देने के पहले कमीशन की रिपोर्ट, स्कन्दपुराण और अन्य दस्तावेजों को देखेगी और इसके बाद ही निर्णय देगी।
अधिवक्ता स्वयं भू लार्ड विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग वाद अमरनाथ शर्मा ने कहा कि ज्ञानवापी का मूल मुकदमा वर्ष 1991 में दाखिल हुआ है। उस वक्त धर्मस्थल विधेयक लागू नहीं था। 1947 में मंदिर का स्वरूप था और तब से पूजा होती चली आ रही है। पूजा पाठ तो कुछ साल पहले बंद कराया गया, इसके बावजूद यहां श्रृंगार गौरी की पूजा हो रही है। एक्ट के क्लॉज 4 (2) में साफ है कि ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर यह लागू नहीं हेागा।