धमकी भरे पत्र में जिक्र है कि आजकल आवश्यकता से अधिक हवा का रुख देखकर चालबाजी दिखा रहे हैं। इस तरफ की भाषा को लेकर पुलिस जांच कर रही है कि यह आखिर किसने और क्यों लिखी है। सिविल जज सीनियर डिवीजन ने अपर मुख्य सचिव गृह को भेजे पत्र में धमकी भरे पत्र का जिक्र करते हुए कहा है कि मेरे द्वारा बहुचर्चित मूलवाद राखी सिंह बनाम यूपी सरकार (ज्ञानवापी प्रकरण) की सुनवाई की गई है।
आदेश में की थी टिप्पणी, सामान्य वाद पर माहौल डरावना बनाया जा रहा
सिविल जज सीनियर डिवीजन ने 12 मई 2022 को कमीशन की कार्यवाही का आदेश जारी करते हुए टिप्पणी की थी साधारण वाद को तूल देकर डर का ऐसा माहौल पैदा कर दिया है कि जब मैं घर से निकलता हूं तो मेरा परिवार चिंतित रहता है। उन्होंने मां की चिंता का जिक्र किया था और आदेश में लिखा था कि मां को लगा कि मैं भी सर्वे के लिए मौके पर जाने वाला हूं तो उन्होंने मुझे जाने से मना कर दिया। धमकी वाले पत्र में इस बात का जिक्र कर भयावह माहौल बनाने का प्रयास किया गया है।
सिविल जज सीनियर डिवीजन को मिले पत्र के साथ कई पत्र संलग्न हैं, जो 18 दिसंबर 2020 की तिथि अंकित कर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन राव, मधुकर राव, भागवत, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, बसपा प्रमुख मायावती, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को संबोधित कर भेजा गया है।
धमकी भरे पत्र की जानकारी होने के बाद ही पुलिस आयुक्त ने टीम गठित करते हुए जांच शुरू करा दी है। इसमें डीसीपी वरुणा आदित्य लांग्हे अपनी टीम के साथ सिविल जज सीनियर डिवीजन से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली। जज के आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दस पुलिसकर्मियों को सुरक्षा में लगाया गया है। पत्र में भड़काऊ भाषा के साथ ही आपकी भारत माता जैसा शब्द लिखकर खंड खंड और विभाजन की भी बात गई है।