ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में सोमवार को एक और याचिका दायर की गई। नई दिल्ली निवासी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्त की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता मंगला प्रसाद पाठक और अभिषेक पाठक ने सिविल जज सीनियर डिवीजन कुमुदलता त्रिपाठी की कोर्ट में वाद दाखिल किया। मामले में सुनवाई मंगलवार को होगी।
वाद में मुख्य रूप से तीन मांग की गई है। जिसमें कहा गया है कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिला है। कह गया है कि भगवान शिव प्रकट हो गए हैं तो उनका पूजन-अर्चन, राग-भोग होना ही चाहिए। साथ ही ज्ञानवापी परिसर में जबरिया निर्माण को गिराने, मुस्लिमों के प्रवेश पर बंद करने और उनके धार्मिक आयोजन पर रोक की मांग की गई है।
इस याचिका में विष्णु गुप्त के साथ खजूरी निवासी अजीत सिंह भी वादी है। इस वाद में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी, काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट , डीएम और पुलिस आयुक्त को पक्षकार बनाया गया है। अदालत में वादी के अधिवक्ता ने नोटिस जारी न करने के लिए सीपीसी 80सी का लाभ देते हुए छूट की मांग की है। ।
डीएम और पुलिस आयुक्त को हाजिर न होने पर नोटिस जारी
ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुदलता त्रिपाठी की अदालत ने विश्व हिंदू महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक शर्मा की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई की। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, डीएम, पुलिस आयुक्त को हाजिर न होने पर नोटिस जारी की और सुनवाई की अगली तारीख 30 जुलाई नियत कर दी।
वादी के अधिवक्ता सत्य प्रकाश शर्मा के मुताबिक इस वाद में ज्ञानवापी परिसर स्थित आदि विश्वेश्वर महादेव, श्रृंगार गौरी की पूजा, आठों मंडपों, सभी धार्मिक प्रतीक चिन्हों व अन्य देवी देवताओं को संरक्षित करने की मांग की गई है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और वादी पक्ष के लोग मौजूद रहे।