वाराणसी की अदालत में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से मूलवाद दायर किया गया। इसमें संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर पर हिंदू पक्ष के अधिकार का दावा करते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। पहला, संपूर्ण ज्ञानवापी भूमि पर हिंदू पक्ष का अधिकार घोषित किया जाए। दूसरा, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को परिसर से हटाया जाए और तीसरा, विवादित ढांचे को हटाकर प्राचीन मंदिर का पुनरुद्धार कराया जाए।
22 वर्षों तक रुकी रही सुनवाई : वर्ष 1998 में मुस्लिम पक्ष ने निचली अदालत की कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद निचली अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई पर करीब 22 वर्षों तक रोक लगी रही। बाद के वर्षों में न्यायिक प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई और इसके बाद सर्वेक्षण, आयोग की कार्रवाई और अन्य याचिकाओं के जरिये मामला लगातार आगे बढ़ता रहा।
2022 और 2023 में मुकदमों की बाढ़, 36 नए मामले दर्ज : साल 2022 और 2023 में ज्ञानवापी का मुद्दा एक बार फिर देश की सुर्खियों में आ गया। इस अवधि के दौरान वाराणसी की निचली अदालतों से सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमों की बाढ़ आ गई। कोर्ट से मिले आंकड़ों के अनुसार, ज्ञानवापी से संबंधित लगभग 36 नए मामले अलग-अलग अदालतों में दर्ज किए गए। इनमें मुख्य रूप से मां शृंगार गौरी की नियमित पूजा के अधिकार की मांग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से पूरे परिसर के वैज्ञानिक सर्वे की मांग शामिल थी।
ज्ञानवापी मामले में मध्यस्थता विफल होने के बाद गेंद पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के पाले में चली गई है। अब सुप्रीम कोर्ट को ही तय करना है कि ज्ञानवापी मामले में 21, 22 और 23 अगस्त को विशेष लोक अदालत लगेगी या फिर नहीं। - राजेश मिश्र, स्पेशल काउंसिल फॉर स्टेट ज्ञानवापी