फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gyanvapi Case : सतह पर आई ज्ञानवापी मामले के पक्षकारों की रार, वादी पक्ष के मतभेद उजागर

Thu, 02 Jun 2022 01:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

विश्व वैदिक सनातन संघ के संस्थापक बिसेन ने वकील हटाने का लिया निर्णय। बोले, हरिशंकर जैन व विष्णु जैन के वकालतनामे सभी मुकदमों से कराएंगे निरस्त। विष्णु जैन ने कहा, ज्ञानवापी-शृंगार गौरी मामले की सुनवाई में चार याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करना जारी रखेंगे। 
विज्ञापन
काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा ज्ञानवापी मस्जिद। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ज्ञानवापी-शृंगार गौरी मामले में कमीशन की कार्यवाही का वीडियो लीक होने के बाद अब वादी पक्ष के बीच छिड़ी रार सतह पर आ गई है। शृंगार गौरी के नियमित दर्शन के लिए दायर याचिका की वादी राखी सिंह के रिश्तेदार और विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने अपनी पैरोकारी के सभी मुकदमों से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन व विष्णु जैन के वकालतनामे को निरस्त करने का निर्णय लिया है। 

विज्ञापन


अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने इस फैसले के पीछे का कारण बताने से इनकार कर दिया। उधर, अधिवक्ता विष्णु जैन ने साफ किया कि वे वाराणसी में ज्ञानवापी-शृंगार गौरी मामले की सुनवाई में चार याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करना जारी रखेंगे।

शृंगार गौरी के नियमित दर्शन व विग्रहों के संरक्षण की मांग को लेकर दायर याचिका में कमीशन की कार्यवाही के दौरान ही पैरोकार जितेंद्र सिंह बिसेन और अधिवक्ता हरिशंकर जैन के बीच दूरियां आने लगी थीं। वीडियो लीक प्रकरण के बाद बिसेन ने हरिशंकर जैन की अध्यक्षता में चल रही हिंद साम्राज्य पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है। 
विज्ञापन


इसके बाद मीडिया को मैसेज के जरिए बताया कि हमने जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपने सभी मामलों में पेश होने से दो वकीलों को हटाने का फैसला किया है। हम काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले में अगली अदालत में सुनवाई के दौरान उनका नाम रद्द करने के लिए आवेदन दाखिल करेंगे। उधर, अधिवक्ता विष्णु जैन ने बताया कि काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिसर मामले में विसेन की भतीजी रेखा सिंह समेत पांच वादी हैं। चार वादियों की ओर से हम अपनी पैरवी जारी रखेंगे।

ज्ञानवापी में हैं आदि विश्वेश्वर, मुस्लिम समाज दिखाएं सहिष्णुता : निश्छलानंद
चार दिवसीय प्रवास पर बुधवार को काशी पहुंचे गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्च्छलानंद सरस्वती ने कहा कि ज्ञानवापी में मिला शिवलिंग आदि विश्वेश्वर हैं। इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आगरा में ताजमहल नहीं तेजोमहल और मक्का में मक्केश्वर महादेव हैं। इन्हें हिंदुओं को सौंप देना चाहिए।

अस्सी स्थित मठ में पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि पूर्वजों ने जो गलतियां की, उसे सुधारने का वक्त आ गया है। ज्ञानवापी समेत अन्य बिंदुओं पर मुस्लिम समाज को सहिष्णुता का परिचय देना चाहिए। कहा कि वे पहले से कह रहे हैं कि ज्ञानवापी में मिला शिवलिंग ही आदि विश्वेश्वर हैं, जो आज सच साबित हुआ है। ज्ञानवापी से जुड़े एक सवाल के जवाब में स्वामी निश्च्छलानंद सरस्वती ने मुस्लिम समुदाय से अपील के साथ सलाह देते हुए कहा कि वे अपने पूर्वजों के मानवाधिकार हनन के लिए उठाए कदम को आदर्श न मानें। मुस्लिम समाज को अपने पूर्वजों की गलतियों को मानकर सहिष्णुता का परिचय देना चाहिए। 

ज्ञानवापी को पूर्व स्वरूप में लाना चाहिए। मानवाधिकार की सीमा में कार्य करने से विश्व की कोई भी शक्ति हमें इससे वंचित नहीं कर सकती। स्वामी निश्च्छलानंद सरस्वती ने एलान किया कि मंदिरों को संरक्षित करने के लिए काशी में तमाम शंकराचार्यों, प्रमुख पीठों के महंत एवं धर्माचार्यों का सम्मेलन भी आयोजित करेंगे। इस मौके पर प्रो. विदेंश्वरी प्रसाद मिश्र, रूपेश पांडेय, राजीव झा, डॉ. पद्माकर दुबे आदि लोग मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें