शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जिला जज की अदालत में वाद दाखिल कर अधिवक्ता आयुक्त के सर्वे में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई थी।
ज्ञानवापी में अधिवक्ता आयुक्त के सर्वे में मिली शिवलिंग जैसी आकृति के पूजा पाठ, राग भोग और दर्शन पूजन की मांग वाली शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वाद को जिला जज की अदालत ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। जिला जज ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि कमीशन के दौरान मिली आकृति को शिवलिंग घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में कथित रूप से पाए गए शिवलिंग की पूजा का अधिकार नहीं दिया जा सकता है। क्योंकि यह निर्धारण होना शेष है कि उस आकृति का स्वरूप क्या है।
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जिला जज की अदालत में वाद दाखिल कर अधिवक्ता आयुक्त के सर्वे में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई थी। इसके पीछे उन्होंने दलील दी कि भगवान नाबालिग होते हैं और उन्हें भूखा नहीं रखा जा सकता। इसके पीछे उन्होंने यह भी हवाला दिया कि ज्ञानवापी में मिली आकृति को शिवलिंग माना गया है। जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद इस वाद को खारिज कर दिया। उन्होंने आदेश में कहा कि उच्चतम न्यायालय की ओर से जारी आदेश में यह कहा गया है कि वह क्षेत्र जहां शिवलिंग कथित रूप से पाया गया है। इससे साफ है कि अभी निर्धारण होना है कि कमीशन के दौरान पाई आकृति शिवलिंग है या नहीं। ऐसे में पूजा पाठ का अधिकार नहीं दिया जा सकता। उधर, वादी के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय का कहना है कि भगवान को भूखा नहीं रखा जा सकता क्योंकि देवता बालक समान है। हम इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।