ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है।
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अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि देश की जनता को ज्ञानवापी से जुड़े इन सवालों के जवाब मिलने जरूरी हैं। ज्ञानवापी में मिली शिवलिंगनुमा आकृति कितनी प्राचीन है? शिवलिंग स्वयंभू है या कहीं और से लाकर उसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई थी? विवादित स्थल की वास्तविकता क्या है? विवादित स्थल के नीचे जमीन में क्या सच दबा हुआ है? मंदिर को ध्वस्त कर उसके ऊपर तीन कथित गुंबद कब बनाए गए? तीनों कथित गुंबद कितने पुराने हैं?
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता के मुताबिक, याचिका राम प्रसाद सिंह, महंत शिव प्रसाद पांडेय, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक की ओर से दाखिल की जाएगी। चारों महिलाएं पहले से ही ज्ञानवापी के मां श्रृंगार गौरी केस की वादिनी हैं।
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने बताया कि 22 मई को जिला जज की अदालत में सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यह अवगत कराएगा कि वजूस्थल स्थित शिवलिंग की किस तरीके से जांच की जाएगी। इस संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण प्रेजेंटेशन भी देगा। इसके बाद जिला जज जैसा आदेश देंगे, उस अनुरूप सर्वे का कार्य शुरू होगा।