उसका कभी विध्वंस नहीं हुआ है, मात्र मंदिर के स्वरूप को क्षतिग्रस्त किया गया। मंदिर के मलबे से ही कथित मस्जिद के भवन का स्वरूप बनाया गया और हर स्थिति में ज्योतिर्लिंग अपने स्थान पर कायम रहा। कुछ अज्ञात लोगो ने ज्योतिर्लिंग को कूप बनाकर ढंकने के बाद एक पोखरी का निर्माण कर वजू का स्थान असांविधानिक तरीके से बना दिया। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग को नुकसान पहुंचाकर हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने, शिवलिंग के ऊपरी भाग में सीमेंटनुमा पदार्थ जमाकर उसे ड्रिल मशीन से छेद कर फव्वारा का रूप देने का प्रयास किया गया।
घटना की सूचना 3 जनवरी 2023 को पुलिस को दी गई। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। निचली अदालत ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया तो उच्च अदालत में निगरानी याचिका दाखिल की गई। अब विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वितीय अनुभव द्विवेदी की अदालत ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई नए सिरे से करने का आदेश दिया है।