रोहिणी के दौरान बारिश हो जाती है तो इसे रोहिणी नक्षत्र का गलना भी कहा जाता है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि सप्तमी तिथि की बढ़ोत्तरी होने के कारण नौतपा 16 दिनों का हो गया। नौतपा की तिथि में एक दिन की बढ़ोत्तरी शुभ नहीं है। इससे दुर्भिक्ष, गर्मी सहित उथल-पुथल की आशंका बन रही है।
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के अनुसार परंपरा के अनुसार नौतपा के दौरान महिलाएं हाथों-पैरों में मेहंदी लगाती हैं। क्योंकि मेहंदी की तासीर ठंडी होने से तेज गर्मी से राहत मिलती है। इन दिनों में पानी खूब पिया जाता है और जल दान भी किया जाता है ताकि पानी की कमी से लोग बीमार न हो।
तेज गर्मी से बचने के लिए दही, मक्खन और दूध का उपयोग ज्यादा किया जाता है। इसके साथ ही नारियल पानी और ठंडक देने वाली दूसरी और भी चीजें खायी जाती हैं।