इतिहासकार ने लिखा है कि राजा मान सिंह व राजा टोडरमल मुंगेर (बिहार) की लड़ाई से दिल्ली लौटते समय काशी (ज्ञानवापी) पहुंचे और जगद्गुरु नारायण भट्ट के निर्देशन में अपने पितरों का श्राद्ध कर्म कराया। इसके लिए उन्हें स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णित ज्ञानवापी महात्म्य यहां खींच लिया जिसमें भगवान शंकर ने स्वयं कहा है कि जो इस ज्ञान क्षेत्र में अपने पितरों का श्राद्ध-तर्पण कराएगा उसे गया के फल्गू तीर्थ में श्राद्ध-तर्पण से करोड़ गुना अधिक फल प्राप्त होगा।
डॉ. तिवारी ने बताया कि उस समय देश में अकाल पड़ा था। राजा मान सिंह व टोडरमल ने जगद्गुरु नारायण भट्ट से भगवान शिव से प्रार्थना कर वर्षा कराने का आग्रह किया। नारायण भट्ट ने विश्वनाथ मंदिर पुनर्निर्माण की शर्त रखी। नारायण भट्ट ने अकबर का फरमान काशी में प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर देश में बारिश कराने का भरोसा दिया।
राजा मानसिंह व टोडर मल अकबर के दरबार पहुंचे तो मुंगेर की लड़ाई के साथ काशी में नारायण भट्ट के साथ बातचीत की पूरी जानकारी दी। अकबर ने विश्वास न करते हुए भी सशर्त फरमान जारी किया कि फरमान के काशी पहुंचने के 24 घंटे में देश में बारिश हुई तो विश्वनाथ मंदिर बनाने की अनुमति प्रदान की जाएगी। फरमान मिलने के 24 घंटे के अंदर शर्त पूरी हुई। मंदिर निर्माण के लिए राजा टोडर मल ने धन की व्यवस्था कराई। नारायण भट्ट के निर्देशन में विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण वर्ष 1585 में कराया गया।