मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज होने के बाद उन्होंने आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने की तैयारी शुरू की है।
कोर्ट ने क्या सुनाया था आदेश
ज्ञानवापी परिसर में हुए सर्वे में मिले शिवलिंग की पूजा व रागभोग करने, मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित करने और परिसर को हिंदुओं को सौंपने की मांग को न्यायालय ने सुनवाई योग्य माना है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल आपत्ति को खारिज करते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने पक्षकारों को लिखित बयान दाखिल करने और वाद बिंदु तय करने के लिए दो दिसंबर की तिथि तय की है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और कानून की नजीरों के आधार पर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ऑर्डर 7 रूल 11 के आवेदन को खारिज कर दिया। अदालत की ओर से दाखिल नाबालिग भगवान आदि विश्वेश्वर के वाद को सुनवाई योग्य पाया।
अंजुमन इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता
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मुस्लिम पक्ष के वकील एखलाक अहमद ने कहा कि हमें ऐसे आदेश का अंदाजा नहीं था। श्रृंगार गौरी के राखी सिंह के वाद से यह बिल्कुल अलग है, मगर न्यायालय ने हमारे खिलाफ आदेश दिया। हम आदेश के खिलाफ रिवीजन दाखिल करेंगे। आदेश का अध्ययन कराया जा रहा है कि आखिर कैसे अदालत ने इसे वर्शिप एक्ट से अलग माना है। हम अपनी बात मजबूती और सभी साक्ष्यों के साथ न्यायालय में रख रहे हैं और रिवीजन में भी पूरी तैयारी के साथ जाएंगे। इस मामले में हमारे पास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे भी खुले हैं।
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ज्ञानवापी में स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग पर दायर वाद में सिविल जज की ओर से ज्ञानवापी परिसर में कराए गए सर्वे में 16 मई 2022 को शिवलिंग की आकृति सामने आई थी। इसके बाद वादी किरण सिंह ने 24 मई 2022 को वाद दाखिल कर वाराणसी के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के साथ ही विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया था। अगले दिन 25 मई को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने मुकदमे को फास्ट ट्रैक अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।