एएसआई ने जीपीआर विधि से सर्वे का हलफनामा दिया था। मगर, मस्जिद के नीचे तहखाना और अन्य जगहों पर खोदाई करके सर्वे किया जा रहा है। तहखाने से मिट्टी निकालकर भवन के पश्चिम में खुली जमीन पर रखी गई है। तीन सितंबर को मिट्टी बाहर भी ले जाई गई। सर्वोच्च न्यायालय ने भी वैज्ञानिक पद्धति और जीपीआर विधि से सर्वे का आदेश दिया था। मगर, एएसआई ने ऐसा नहीं किया।
कमेटी के मुताबिक दो सितंबर को जिला जज की अदालत में जो प्रार्थना पत्र दिया गया है, उसमें स्वीकार किया गया है कि मलबा हटाकर सर्वे करने में समय लगेगा। अदालत की अनुमति के बगैर ही मिट्टी की खोदाई करके सर्वे किया जा रहा है। एएसआई को पहले भी चार सप्ताह का समय दिया जा चुका है। मगर, सर्वे की कार्रवाई को विलंबित करने के उद्देश्य से दो सितंबर को नया प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया।
ऐसे में समयसीमा बढ़ाने का प्रार्थना पत्र को निरस्त किया जाना चाहिए। यहां बता दें ज्ञानवापी स्थित मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन और अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान जिला जज की अदालत ने एएसआई सर्वे का आदेश दिया था। न्यायालय के आदेश पर सर्वे की मियाद की पूरी होने के बाद एएसआई ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय और मांगा है।