अधिवक्ता मानबहादुर सिंह और विश्वनाथ मंदिर के वाद मित्र विजय शंकर
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दर्शन पूजन पूजा पाठ हमारा सिविल अधिकार है, इसे रोका नहीं जाना चाहिए। अदालत में बहस के दौरान श्रृंगार गौरी कहां स्थित है इसे कोर्ट में स्पष्ट कर बताया गया कि विवादित मस्जिद के पीछे है जहां अवैध निर्माण कर मस्जिद बनाई गई है। दलील में कहा कि पूजा पाठ पर लगी रोक को हटाई जाय और सिविल अधिकार के तहत पूजा पाठ करने दिए जाने की याचना की गई।
वादिनी पक्ष की दलील समाप्त होने पर काशी विश्वनाथ मंदिर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी और गिरीश उपाध्याय ने इस वाद में पक्षकार बनाये जाने के आवेदन पर अपना पक्ष रखना चाहा। हालांकि जिला जज ने यह कहते हुए इजाजत नहीं दी कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर ऑर्डर 7 रूल 11 के आवेदन पर निर्णय देना है, पक्षकार बनने के मुद्दे पर बाद में सुनवाई होगी। इसके बाद डीएम, पुलिस आयुक्त और प्रदेश शासन के मुख्य सचिव की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पाण्डेय ने दलील रखी।
सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में आदि विश्वेश्वर आदि की तरफ दाखिल वाद में अन्जुमन इन्तजामिया मसाजिद कमेटी को आपत्ति दर्ज कराने के लिए समय मांगे जाने पर अदालत ने 16 अगस्त की तिथि नियत कर दी। इस अदालत में विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह विसेन की पत्नी किरन सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने वाद दाखिल कर परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, सर्वे में मिले कथित शिवलिंग के पूजा पाठ के साथ परिसर हिंदुओ को सौंपे जाने की मांग की है।