ज्ञानवापी परिसर में कमीशन की कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए वादी हिंदू पक्ष की मांग व कारमाइकल लाइब्रेरी में मिले गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति को सुरक्षित व संरक्षित करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। इस बीच अंजुमन द्वारा समय मांगे जाने पर 100 रुपये जुर्माना भी लगाया था और दोनों पक्षों को सख्त हिदायत देते हुए गंभीर टिप्पणी भी की थी।
सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई एक बार फिर टल गई। इसमें ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ राग भोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण अब अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तिथि नियत की गई है।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी, रमेश उपाध्याय चंद्रशेखर सेठ के माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है। इसमें श्रृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का रागभोग, पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था, लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है। न किसी अन्य सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को इसके लिए नियुक्त किया।
उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की परिस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है। वहीं दूसरी तरफ वादी मुख्तारअहमद की ओर से ज्ञानवापी में उर्स करने के लिए दाखिल वाद में सुनवाई के लिए आठ दिसंबर की तिथि नियत की गई है। यह मामला सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट सीनियर डिवीजन महेंद्र पांडेय की अदालत में लंबित है। इसमें उर्स करने और हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की मांग की गई है। संवाद