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Gyanvapi: ज्ञानवापी परिसर में कमीशन की कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग, अब पांच दिसंबर को सुनवाई

Fri, 11 Nov 2022 06:35 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

ज्ञानवापी परिसर में तहखाने को तोड़कर और मलबे को हटाकर कमीशन की कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग पर सुनवाई होनी है। हिंदू पक्ष की इस मांग पर मुस्लिम पक्ष की ओर से आपत्ति दाखिल की गई है। 
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ज्ञानवापी परिसर - फोटो : Social Media
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विस्तार
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वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण के वाद में शुक्रवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुनवाई टल गई। इस मामले में कार्बन डेटिंग को लेकर वादिनी के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने हाईकोर्ट में अपील की है। इसी के मद्देनजर हाईकोर्ट ने यहां लंबित मामले में दिसंबर के पहले सप्ताह में तारीख नियत करने को कहा था। इसी क्रम में जिला जज की अदालत ने पांच दिसंबर की अगली तिथि नियत कर दी। 

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इस मामले में ज्ञानवापी परिसर में तहखाने को तोड़कर और मलबे को हटाकर कमीशन की कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग पर सुनवाई होनी है। हिंदू पक्ष की इस मांग पर मुस्लिम पक्ष की ओर से आपत्ति दाखिल की गई है। इस पर हिंदू पक्ष की ओर से प्रति आपत्ति दाखिल करने के लिए अदालत ने 11 नवंबर की तिथि नियत कर दी थी।

कार्बन डेटिंग की मांग पहले ही खारिज

इस बीच हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में पांच दिसंबर की तिथि नियत कर दी। सत्र न्यायाधीश की अदालत हिंदू पक्ष के कार्बन डेटिंग की मांग पहले ही खारिज कर चुकी है। साथ ही 21 अक्तूबर को कोर्ट ने ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी केस में पार्टी बनने के लिए दिए गए सभी पक्षकारों के आवेदन को खारिज कर दिया था।

ज्ञानवापी परिसर में कमीशन की कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए वादी हिंदू पक्ष की मांग व कारमाइकल लाइब्रेरी में मिले गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति को सुरक्षित व संरक्षित करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। इस बीच अंजुमन द्वारा समय मांगे जाने पर 100 रुपये जुर्माना भी लगाया था और दोनों पक्षों को सख्त हिदायत देते हुए गंभीर टिप्पणी भी की थी।

ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा की मांग पर सुनवाई 18 को

सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई एक बार फिर टल गई। इसमें ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ राग भोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण अब अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तिथि नियत की गई है।   

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी, रमेश उपाध्याय चंद्रशेखर सेठ के माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है। इसमें श्रृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का रागभोग, पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था, लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है। न किसी अन्य सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को इसके लिए नियुक्त किया।
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उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की परिस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है। वहीं दूसरी तरफ वादी मुख्तारअहमद की ओर से ज्ञानवापी में उर्स करने के लिए दाखिल वाद में सुनवाई के लिए आठ दिसंबर की तिथि नियत की गई है। यह मामला सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट सीनियर डिवीजन महेंद्र पांडेय की अदालत में लंबित है। इसमें उर्स करने और हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की मांग की गई है। संवाद
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