ज्ञानवापी परिसर से 1991 के मूल वाद में 2019 में हुई वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिका पर मंगलवार को अपर जिला जज अष्टम अमित कुमार तिवारी की अदालत में सुनवाई हुई। अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तिथि नियत की है। मूल वाद वर्ष 1991 में भगवान आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के मालिकाना हक, राग-भोग, पूजा-अर्चना मंदिर पुनर्निर्माण की मांग को लेकर दाखिल किया गया था। तत्कालीन मुख्य पुजारी पंडित स्व. सोमनाथ व्यास, पंडित स्व. रामरंग शर्मा और पंडित स्व. हरिहर पांडेय वादी थे। आवेदिका अनुष्का तिवारी की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है।
ज्ञानवापी मामले की सुनवाई 31 अगस्त को
सिविल जज अभिषिक्ता यादव की कोर्ट में मंगलवार को ज्ञानवापी मामले की सुनवाई टल गई। पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सुनवाई रोकने की मांग की थी। अश्वनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वरशिप एक्ट के तहत विवादित मामलों की सुनवाई पर रोक लगाई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस विशिष्ट ज्ञानवापी मामले में कोई आदेश नहीं दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुकदमे का छह महीने में निस्तारण करने का आदेश दिया था, जिसके तहत सुनवाई जारी है। यह सुनवाई ज्ञानवापी परिसर में नए मंदिर निर्माण और हिंदुओं को पूजा अधिकार देने से जुड़े 1991 के मुकदमे से संबंधित है। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील तौहिद खान ने भी सुनवाई रोकने का प्रार्थना पत्र दिया है, जिस पर सुनवाई लंबित है।