वाराणसी कोर्ट परिसर में हिंदू पक्ष के अधिवक्ता
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विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हम लोगों ने कोर्ट से सुबह 8 से 12 बजे के बीच सर्वे कराने की मांग की है। इस दौरान समय अवधि में तथाकथित मस्जिद में किसी तरह का नमाज या कोई अन्य गतिविधि नहीं होती। अगर सुबह 8 से 12 बजे के बीच सर्वे होगा तो किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी।
पिछले एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही के दौरान खूब हंगामा हुआ था। इधर, हिंदू पक्ष के ही एक अन्य अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। इसके चलते वैमनस्यता फैली। हिंदू पक्ष कलेजे पर पत्थर रख कर इसे सहन कर रहा है। यह ऐतिहासिक साक्ष्य है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई है।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि देश की जनता को ज्ञानवापी से जुड़े इन सवालों के जवाब मिलने जरूरी हैं। ज्ञानवापी में मिली शिवलिंगनुमा आकृति कितनी प्राचीन है? शिवलिंग स्वयंभू है या कहीं और से लाकर उसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई थी? विवादित स्थल की वास्तविकता क्या है? विवादित स्थल के नीचे जमीन में क्या सच दबा हुआ है? मंदिर को ध्वस्त कर उसके ऊपर तीन कथित गुंबद कब बनाए गए? तीनों कथित गुंबद कितने पुराने हैं?
अदालत में हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि बीते वर्ष एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के दौरान मौजूदा समय में ज्ञानवापी के विवादित स्थल पर जो स्ट्रक्चर है, उसके खंभों पर संस्कृत के श्लोक व घंटियां व स्वास्तिक मिले हैं। मां श्रृंगार गौरी का विग्रह पश्चिमी भाग में है। मंदिर के पश्चिमी दीवार के ऊपर निर्माण कर शिखर पर तीन गुंबद बनाए गए हैं। उसके नीचे पेंटिंग से मंडप बनाया गया है, जो प्राचीन हिंदू मंदिर का प्रतीक है। अदालत से पश्चिमी दीवार के पास खंडहरनुमा अवशेष, तीन गुंबदों और व्यासजी के तहखाने की जांच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जीपीआर तकनीक और साइंटिफिक पद्धति से कराने की मांग की गई।