रस्तोगी का कहना है कि अप्रैल 2026 में स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) के माध्यम से उन्हें सूचना मिली कि शासनादेश के तहत उनकी सुरक्षा व्यवस्था की अवधि छह माह के लिए बढ़ा दी गई है। हालांकि इस बार सुरक्षा व्यवस्था के लिए 25 प्रतिशत निजी व्यय निर्धारित कर दिया गया है। इसके बाद उन्हें सुरक्षा मद में 2.08 लाख रुपये से अधिक की धनराशि जमा करने का नोटिस भी प्राप्त हुआ।
उन्होंने पत्र में कहा कि जब सुरक्षा व्यवस्था उनकी व्यक्तिगत मांग पर नहीं, बल्कि मामले की संवेदनशीलता और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के आधार पर प्रदान की गई थी, तब उसका खर्च उन पर डालना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हें सुरक्षा शुल्क से पूर्णतः मुक्त किया जाए तथा पूर्व की भांति निःशुल्क सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह बिना किसी दबाव और भय के न्यायालय में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।