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गरीब छात्रों के मसीहा थे गुरुजी

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के संघ सर चालक गुरुजी सदाशिव राव गोलवलकर की कर्मभूमि महामना की बगिया थी। वह गरीब छात्रों के मसीहा थे।
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पांच जून को गुरुजी की पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि गुरुजी 1924 में काशी आए थे। बीएचयू से ही उन्होंने वनस्पतिशास्त्र, प्राणिशास्त्र और रसायनशास्त्र से बीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद प्राणिशास्त्र से एमएससी की परीक्षा में टॉप करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए मद्रास चले गए। दोबारा वह काशी आए। महामना के निवेदन पर उन्होंने बीचयू में प्राणिशास्त्र पढ़ाना शुरू किया। 16 अगस्त 1931 को गुरुजी बीएचयू में प्राणिशास्त्र विभाग के निदेशक बने। यहीं पर छात्र उन्हें गुरुजी के नाम से बुलाने लगे जो उनका उपनाम ही बन गया। अध्यापन के दौरान वो जो कुछ वेतन पाते थे वो सारा वेतन गरीब छात्रों की फीस और उनकी कॉपी-किताब पर ही खर्च कर देते थे। महामना ने ही उनकी मुलाकात डॉ. काशी राव बलिराम हेडगेवार से कराई और उनकी ही प्रेरणा से वे संघ की सेवा करने लगे।
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गुरु जी की याद में ब्रोचा छात्रावास को किया जाए संरक्षित
बनारस बार के पूर्व महामंत्री व वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानन्द राय ने मांग की कि जिस ब्रोचा छात्रावास में वे रहते थे उस कमरे को उनके स्मृति के तौर पर संरक्षित किया जाए। जिस प्राणी विज्ञान विभाग में वे पढ़ाते थे उस विभाग में गुरुजी की याद में गुरुजी के नाम से एक उच्च स्तरीय शोध संस्थान स्थापित किया जाए। साथ ही गुरुजी की एक प्रतिमा महामना की बगिया में स्थापित की जाए।
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जन्म - 19 फरवरी 1906 रामटेक में
निधन-पांच जून 1973 नागपुर में
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