गुरु पूर्णिमा पर पातालपुरी मठ में गुरु-शिष्य परंपरा का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला। 250 से ज्यादा मुस्लिम और 100 से ज्यादा आदिवासियों ने मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य से दीक्षा ली। उन्हें तिलक लगाया गया और फिर उनकी विधिवत आरती उतारी गई। शिष्यों ने गुरु के चरण स्पर्श किए और उनका आशीर्वाद लिया। पूर्वांचल के पांच जिलों से मुस्लिम परिवार पहुंचे थे। इसमें 20 से ज्यादा महिलाएं रहीं।
मुस्लिम समाज के लोग जाकिर पांडेय और अफरोज पांडेय के नेतृत्व में बालक देवाचार्य से दीक्षा लेने पहुंचे थे। जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने सभी शिष्यों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि उनके हजारों शिष्य मुसलमान हैं। ये शिष्य कई पीढ़ियों से रामानंदी संप्रदाय के अनुयायी हैं। छुआछूत और भेदभाव को मिटाकर सभी को एक करना ही गुरु का काम है। भारतीय संस्कृति किसी तरह के भेद को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने कहा कि रामपंथ सभी लोगों को स्वीकार्यता प्रदान करता है।