वर्ष 1997 में लखनऊ के एक नामी स्कूल के खेल शिक्षक की हत्या हुई थी। इसमें जौनपुर के एक बाहुबली के साथ ही गुड्डू का भी नाम सामने आया था। जौनपुर के बाहुबली और उस समय के उसके दोस्तों की मदद से गुड्डू ने रेलवे के ठेकों में भी अपनी किस्मत आजमाई थी। वर्ष 1997 में ही एक अभियंता की हत्या में भी जौनपुर के बाहुबली और गुड्डू का नाम सामने आया था।
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बमबाज मुस्लिम गुड्डू के घर पर पीडीए ने चस्पा किया ध्वस्तीकरण का नोटिस।
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इसके बाद गुड्डू मुठभेड़ में मारे गए गोरखपुर के बदमाश श्रीप्रकाश शुक्ला का भी शागिर्द रहा। वर्ष 2000 के बाद गुड्डू की नजदीकी माफिया मुख्तार अंसारी के साथ बढ़ी तो उसका दायरा भी पूर्वांचल से लेकर बिहार तक बढ़ता चला गया। 2001 में पटना में गुड्डू पकड़ा गया तो फिर अतीक ने उसकी जमानत में मदद की और वह उसी का गुर्गा बन कर रह गया। हालांकि इसके बाद भी मुख्तार और उसके गुर्गों से गुड्डू कभी दूर नहीं हुआ।
माफिया अतीक अहमद के गुर्गों में गुड्डू मुस्लिम एक ऐसा बदमाश है, जिसने जरायम जगत में खुद का भी एक अलग नेटवर्क बना रखा है। पूर्वांचल में गुड्डू के मददगारों और शरणदाताओं की भी कमी नहीं है। पुलिस अफसरों का कहना है कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि उमेश पाल हत्याकांड के बाद पूर्वांचल के अपने पुराने कनेक्शन के सहारे गुड्डू नेपाल भाग गया हो। वहां से वह किसी अन्य सुरक्षित ठिकाने की ओर रुख कर गया होगा।