इसमें 48 फीसदी करदाताओं की उम्र 21-30 वर्ष के बीच रही। इसमें 60.8 फीसदी महिला और 39.2 फीसदी पुरुष हैं। 41.2 प्रतिशत स्नातक और 27 प्रतिशत स्नातकोत्तर थे। इससे पता चलता है कि ज्यादातर लोग अच्छी तरह से शिक्षित थे। इनमें से 30.4 फीसदी परिवारों ने प्रति माह एक लाख रुपये से ज्यादा कमाया। 79.4 फीसदी लोगों को ही जीएसटी 2.0 सुधारों के बारे में जानकारी थी। इस दौरान 60.8 फीसदी लोगों स्वीकार किया कि ऑनलाइन खरीदारी बढ़ी है।
कटौती के बावजूद दुकानदार नहीं कम करते कीमतें
86.8 फीसदी लोगों ने बताया कि चालानों पर जीएसटी विवरण स्पष्ट रूप से नहीं दिखते हैं। 84.3 फीसदी को अपने बिलों को समझने में कठिनाई हुई। 61 फीसदी से ज्यादा लोगों ने कहा कि जीएसटी-2.0 के बावजूद खुदरा विक्रेताओं की ओर से ज्यादा शुल्क वसूलना जारी है। कुछ करदाताओं ने यह भी बताया कि जीएसटी दरों में कटौती होने के बावजूद भी खुदरा विक्रेता कीमतें कम नहीं करते।
मूल्य निर्धारण पारदर्शिता पर अविश्वास
डॉ. लाल बाबू जायसवाल ने कहा कि वाराणसी के उपभोक्ता जीएसटी-2.0 के बारे में जागरूक हैं। वे इसके संभावित लाभों को समझते हैं, लेकिन कार्यान्वयन, मूल्य निर्धारण पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उनमें अविश्वास बना हुआ है। सस्ते और घरेलू सामानों के प्रति व्यवहार में बदलाव, विशेष रूप से युवा और मध्यम आय वर्ग के उपभोक्ताओं में उच्च मूल्य संवेदनशीलता का संकेत देता है।