धान की सीधी बोआई से 10 दिन पहले कटाई : इरी के आइसार्क ने धान की सीधी बोआई (डीएसआर) पर की पद्धति तैयार किया है। डॉ. शुधांशु सिंह ने बताया कि विश्व बैंक के सहयोग से यूपीएग्रीज परियोजना के तहत डीएसआर से धान की बोआई करते हैं तो इसकी कटाई 7–10 दिन पहले हो जाती है।
साथ ही पानी, मजदूरी और डीजल की भी बचत होती है। मशीन से कटाई और अवशेष प्रबंधन जल्दी हो जाते हैं। जीरो टिलेज गेहूं की पद्धति को अपनाने से खेत को जोतने की जरुरत नहीं होती है, जिससे समय पर बोआई हो जाती है। इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है।
लंबी अवधि का धान देर का कारण : गेहूं की बोआई में ज्यादातर देरी लंबी अवधि की धान की फसल है। डॉ. शुधांशु सिंह ने बताया कि पूर्वांचल समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश में गेहूं की 60 फीसदी बोआई देरी से होती है। ज्यादा किसान खरीफ मौसम में लंबी अवधि की धान की किस्में लगाते हैं और उन्हें रोपाई कर उगाते हैं। इस पद्धति से खेत तैयार होने में समय लगता है। ऐसे में कटाई व मड़ाई में देरी होती है।