जीएसटी लागू हुए एक महीना बीत गया है लेकिन बनारस में 90 हजार व्यापारियों और उद्यमियों में से 15 हजार से ज्यादा को अभी तक जीएसटी नंबर ही नहीं मिल पाया है। इसके चलते बाजार और व्यवस्था में कई मुद्दों पर संशय की स्थिति बनी हुई है।
हालांकि उद्यमी-व्यापारी जीएसटी विशेषज्ञों और अपने नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। असमंजस के कारण केराना मार्केट सहित सभी बाजारों में थोक माल कम मात्रा में मंगाया जा रहा है।
व्यापारियों ने जीएसटी नंबर के लिए नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही आवेदन किया था लेकिन अभी तक जीएसटी नंबर न मिलने और प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी न होने से समस्या बरकरार है। इनमें पांच हजार व्यापारी ऐसे हैं, जिन्हें पैन अपडेट न होने से जीएसटी नंबर नहीं मिल सका है।
वैसे जीएसटी नंबर नहीं मिलने तक व्यापारियों को टिन नंबर पर व्यवसाय करने की छूट दी गई है। व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई हैं लेकिन कई सवालों के जवाब यहां भी नहीं मिल पा रहे हैं।
उधर, ज्वाइंट कमिश्नर वीके शुक्ला और असिस्टेंट कमिश्नर सीमा सरोज ने बताया कि जीएसटी नंबर देने के साथ-साथ व्यापारियों को जीएसटी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
व्यापारियों को डरा रहा ई-वे बिल
केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को तीन महीने तक की छूट देने की बात कही है लेकिन अचानक ई-वे बिल की व्यवस्था लागू कर दी गई। जीएसटी नंबर न मिल पाने की वजह से 15 अगस्त तक ई-वे बिल में राहत तो दे दी गई है पर अभी व्यापारी इसके लिए तैयार नही हैं।
चार्टर्ड एकाउंटेंट सुदेशना बासु बताती हैं कि ऑनलाइन सेल्फ हेल्प डेस्क पर सभी जानकारी उपलब्ध है। व्यापारी यहां रजिस्ट्रेशन आसानी से करा सकते हैं। जानकारों का कहना है कि रिटर्न और ई-वे बिल एक-दो बार भरने के बाद समस्याएं कम हो जाएंगी।
रिटर्न ने बढ़ाया तनाव
अगस्त शुरू होते ही जीएसटी के तहत रिटर्न भरने का तनाव भी व्यापारियों के चेहरे पर झलकने लगा है। हालांकि विभाग का कहना है कि रिटर्न भरने का फार्मेट काफी सरल है। इस बार जीएसटीआर के तहत रिटर्न भरना होगा। जुलाई का रिटर्न 30 अगस्त और अगस्त का रिटर्न 30 सितंबर तक दाखिल करना है।