पल्हनी शिक्षा क्षेत्र के चकगोरया के कंपोजिट विद्यालय की छत पर सब्जियों की फसल को देखत प्रधानाध्?
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आजमगढ़। ‘लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ सोहन लाल द्विवेदी की यह कविता कंपोजिट विद्यालय चकगोरया के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार राय पर सटीक बैठती है। एक तरफ जहां बजट के अभाव में परिषदीय विद्यालयों में चलने वाली किचन गार्डन योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है, वहीं चकगोरया के प्रधानाध्यापक दूसरे विद्यालयों के लिए नजीर पेश कर रहे हैं। विद्यालय में भूमि न होने पर उन्होंने स्टाफ की मदद से छत पर ही किचन गार्डन बना दिया है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय के पास जमीन नहीं होने से किचन गार्डन बनाया जाना संभव नहीं था। इसी बीच प्राथमिक विद्यालय भरौली अजमतगढ़ की शिक्षक प्रज्ञा राय ने उन्हें छत पर ही सब्जियों की खेती करने की सलाह दी। इस पर उन्होंने सब्जियां उगाने की ठान ली और अपने स्टाफ के साथ मिलकर विद्यालय की छत पर ही गमले में हरी सब्जियों के पौधे लगाने लगे। पहले उन्होंने एक-दो पौधे लगाए। इसके बाद धीरे-धीरे सभी प्रकार की सब्जियों की खेती करने लगे। सब्जियों की खेती के लिए वह थर्माकोल को गमले की तरह प्रयोग कर रहे हैं। अनिल कुमार ने बताया कि व्यापारी बड़े-बड़े थर्माकोल में सामान लाते हैं। जिसका प्रयोग करके फेंक देते या फिर उसे जला देते हैं। इससे पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। लिहाजा उनको यह आसानी से मिल गए और इनको ही गमले का स्वरूप दे दिया।
इन सब्जियों की हो रही खेती
अनिल कुमार राय ने बताया कि किचन गार्डन में वर्तमान में टमाटर, बैगन, पालक, मूली, धनिया, लहसुन, प्याज, लौकी, कोहड़ा व नेनुवा की फसल तैयार की जा रही है। कुछ सब्जियों के फल आ गए हैं जबकि कुछ में अभी फूल लगे हुए हैं। अब विद्यालय की छत फूलों की खुशबू से महक रही है। तरह-तरह के फूल सबको आकर्षित भी कर रहे हैं।
400 विद्यालयों में बनाए जाने थे किचन गार्डन
शासन की ओर से 400 विद्यालयों में किचन गार्डन योजना के तहत हरी सब्जियाें की खेती की जानी थी। इसके लिए शासन स्तर से प्रति विद्यालय पांच हजार रुपये दिए जाने थे। एक साल हो गए, लेकिन अभी तक शासन की ओर से इसके लिए कोई बजट नहीं जारी किया गया। बजट के अभाव में अभी तक चिह्नित किए गए विद्यालयों में किचन गार्डन नहीं तैयार किए जा सके हैं।