एनसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि पूर्वांचल में तीन साल के अंदर कुछ मामले सामने आए हैं।। महंगे नशे को ड्रग्स की दुनिया में ग्रीन गोल्ड कहा जाता है। दो साल पहले एसटीएफ ने हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ा था। तब इसका नाम प्रकाश में आया। दो दिन पहले रविंद्रपुरी से 10 लाख रुपये का हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ा गया। जिसमें एक तस्कर गोरखपुर का था, ऐसे में जांच टीम ने उससे जानकारी जुटाई है कि उसने अब तक कितनों को माल दिया है और ये गांजा उस तक पहुंचा कैसा।
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ओडिशा, कोलकाता और वाराणसी में बरामदगी
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत छत्तीसगढ़ में हाइड्रोपोनिक गांजे की सप्लाई का ट्रांजिट पॉइंट ओडिशा और कोलकाता रहा है। बीते दिनों वाराणसी एयरपोर्ट पर बरामद गांजे ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। जांच टीम अब इस दिशा में नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। साथ ही एक साल के अंदर देश में पकड़े गए तस्करों के संपर्क को भी खंगालने में जुट गई है।
हाइड्रोपोनिक खेती से उगाया जाने वाला गांजा होता है। पौधों को मिट्टी में नहीं उगाया जाता। पानी में घुले खास पोषक तत्वों के सहारे तैयार किया जाता है। पौधों की जड़ों को पानी, पोषण मिलता है। इस तकनीक से कमरे में भी खेती की जाती है। इस तरह से तैयार गांजे में नशीला तत्व सामान्य गांजे की तुलना में ज्यादा होता है। इसी कारण यह महंगा बिकता है।
क्या बोले अधिकारी
मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह के बारे में तफ्तीश जारी है। अब तक पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस तस्करी के बड़े नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में अहम जानकारी मिली है। -राजकुमार त्रिपाठी, उपाधीक्षक एएनटीएफ