फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नशे का साम्राज्य: ऑनलाइन डार्क वेब से पूर्वांचल में पहुंचा ग्रीन गोल्ड गांजा, इसके सबसे बड़े खरीदार विदेशी

Sat, 04 Apr 2026 04:18 PM IST
Pragati Chand रवि प्रकाश सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।

सार

Varanasi News: ऑनलाइन डार्क वेब से ग्रीन गोल्ड गांजा पूर्वांचल में पहुंच गया है। इसके सबसे बड़े खरीदार विदेशी हैं। बड़े होटलों में विदेशियों को ऑन डिमांड पैडलर की मदद से गांजा की खपत की जा रही है।
विज्ञापन
ग्रीन गोल्ड गांजे की तस्करी - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ग्रीन गोल्ड नाम से पहचान रखने वाली हाइड्रोपोनिक गांजा की सप्लाई के लिए तस्कर बड़े शहरों के बाद पूर्वांचल को भी निशाना बना रहे हैं। तस्कर अब पूर्वांचल में पर्यटन और व्यापार के बड़े केंद्र वाराणसी के साथ ही अन्य बड़े महानगरों तक पहुंच बना रहे हैं। रेव पार्टियों, बड़े होटलों में विदेशियों को ऑन डिमांड पैडलर की मदद से थाईलैंड से मंगाए हाइड्रोपोनिक गांजा की खपत की जा रही है।

विज्ञापन


बाबतपुर एयरपोर्ट पर 10 मार्च को पकड़ा गया थाईलैंड का गांजा भी पूर्वांचल में ही खपना था। जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 25 करोड़ रुपये थी। आठ महीने पहले भुवनेश्वर बीजू पटनायक एयरपोर्ट पर पकड़ा गया हाइड्रोपोनिक गांजा भी थाईलैंड से आया था। दोनों मामलों में तस्कर गुजरात के थे। एनसीबी, एएनटीएफ और एसटीएफ जांच कर रही है।

जांच में सामने आया कि ग्रीन गोल्ड हाइड्रोपोनिक गांजे की तस्करी का ट्रांजिट प्वाइंट कोलकाता और ओडिसा है। जो थाईलैंड के रास्ते हवाई मार्ग से पहुंच रहा है। इसके बाद ही अन्य शहरों के लिए ऑन कॉल डिमांड कूरिअर समेत अन्य माध्यमों से भेजा जा रहा है। 
विज्ञापन


इस ब्रीड की मांग खासकर रेव पाटियों, हाईफाई क्लब और विदेशी पर्यटकों के बीच में है। खासकर वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज, लखनऊ में इसकी अधिक मांग है। बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, जयपुर, बंगलूरू में डार्क वेब नेटवर्क के जरिये खरीद के कुछ मामले पकड़ में आए थे। छोटे शहरों में खुले में बिकने वाला गांजा ओडिसा और बंगाल का है। 

एनसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि पूर्वांचल में तीन साल के अंदर कुछ मामले सामने आए हैं।। महंगे नशे को ड्रग्स की दुनिया में ग्रीन गोल्ड कहा जाता है। दो साल पहले एसटीएफ ने हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ा था। तब इसका नाम प्रकाश में आया। दो दिन पहले रविंद्रपुरी से 10 लाख रुपये का हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ा गया। जिसमें एक तस्कर गोरखपुर का था, ऐसे में जांच टीम ने उससे जानकारी जुटाई है कि उसने अब तक कितनों को माल दिया है और ये गांजा उस तक पहुंचा कैसा। 

इसे भी पढ़ें; Ghazipur News: पिकअप से टक्कर के बाद बेकाबू ट्रेलर गंगा में गिरा, दो लापता; वीर अब्दुल हमीद सेतु पर हुआ हादसा

ओडिशा, कोलकाता और वाराणसी में बरामदगी
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत छत्तीसगढ़ में हाइड्रोपोनिक गांजे की सप्लाई का ट्रांजिट पॉइंट ओडिशा और कोलकाता रहा है। बीते दिनों वाराणसी एयरपोर्ट पर बरामद गांजे ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। जांच टीम अब इस दिशा में नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। साथ ही एक साल के अंदर देश में पकड़े गए तस्करों के संपर्क को भी खंगालने में जुट गई है।
विज्ञापन

पानी में घुले खास पोषक तत्वों के सहारे होता है तैयार

हाइड्रोपोनिक खेती से उगाया जाने वाला गांजा होता है। पौधों को मिट्टी में नहीं उगाया जाता। पानी में घुले खास पोषक तत्वों के सहारे तैयार किया जाता है। पौधों की जड़ों को पानी, पोषण मिलता है। इस तकनीक से कमरे में भी खेती की जाती है। इस तरह से तैयार गांजे में नशीला तत्व सामान्य गांजे की तुलना में ज्यादा होता है। इसी कारण यह महंगा बिकता है।
 

क्या बोले अधिकारी
मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह के बारे में तफ्तीश जारी है। अब तक पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस तस्करी के बड़े नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में अहम जानकारी मिली है। -राजकुमार त्रिपाठी, उपाधीक्षक एएनटीएफ

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें