गंगा की स्वच्छता और अविरलता के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) ने बड़ी परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत गंगा स्वच्छता, जलीय जंतुओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर दो हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
गंगा किनारे गोमुख से गंगा सागर तक पौधे रोपे जाएंगे और हरित पट्टी का विकास होगा। इसके लिए खाली स्थानों का चयन शुरू हो गया है। एनएमसीजी की इस योजना के परवान चढ़ने पर गंगा के किनारे दर्शनीय हो जाएंगे। 2500 किमी लंबी गंगा के दोनों किनारों पर फॉरेस्टेशन यानी पौधरोपण किया जाएगा।
योजना के तहत जलीय जंतुओं जैसे डॉलफिन, कछुए एवं विलुप्त हो रहे दूसरे जलीय जीवों को भी संरक्षित किया जाएगा। माना जा रहा है कि गंगा के साफ होने पर ही जलीय जीवों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
एनएमसीजी के कंसलटेंट एवं प्रभारी संदीप बेहरा ने बताया कि पौधे लगाने की जिम्मेदारी राज्यों को दी गई है। गंगा की धारा वाले राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के वन विभाग पौधों का संरक्षण भी करेंगे। एनएमसीजी उसकी निगरानी करेगा।