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समाज आगे और सत्ता को पीछे के मंत्र से होगा समाज का स्वस्थ विकास

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राजनीति से संन्यास ले चुके चिंतक और विचारक केएन गोविंदाचार्य का कहना है कि समाज आगे होगा और सत्ता पीछे होगी तभी देश का स्वस्थ विकास होगा। देश में पहले धर्म सत्ता है, फिर समाज सत्ता, राज सत्ता व इसके बाद अर्थ सत्ता का प्रभाव है। देश के स्वस्थ विकास के लिए समाज हमेशा आगे रहा है। एनडीए से शिवसेना के अलग होने और अकाली दल से नाराजगी पर उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि हमारा देश सत्ता से नहीं संस्कारों से चलता है। ऐेसे में किसी की नाराजगी और खुशी बहुत मायने नहीं रखती है।
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तीन दिवसीय अध्ययन यात्रा पर शनिवार को वाराणसी पहुंच केएन गोविंदाचार्य ने किसान बिल पर भी बात की। उनसे पूछा गया कि कांग्रेस अपने मेनिफेस्टो में किसान बिल को शामिल कर चुकी है, मगर अब उसका विरोध कर रही है। इस पर उन्होंने कहा कि एकाग्र होने के कारण बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। मगर, हमारे देश की जरूरत को देखते हुए लो कास्ट, लो कैपिटल, मल्टी क्राप कृषि की जरूरत है। कृषि को गो पालन से जोड़ने की बहुत आवश्यकता है। कृषि के सरकारीकरण, सहकारीकरण, निजीकरण या कॉरपोरेटाइजेशन से इसका भला नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि देश में गरीबी कम नहीं हुई, बल्कि अपराध, बेरोजगारी और विषमता बढ़ी है। गरीब और महिलाओं की स्थिति खराब हुई है। उन्होंने कहा कि पहले अर्थसत्ता हावी थी और अब तकनीकी सत्ता हावी है। सोशल मीडिया पर लोकपाल जैसी व्यवस्था लागू करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गंगा जी और गौ माता की चिंता किए बिना स्वदेशी विकास संभव नहीं है। चीन विवाद पर उन्होंने कहा कि भारत का सभ्यता मूलक आग्रह देश का तकाजा है। हम सबकी इच्छा है कि कैलाश मानसरोवर भारत का अभिन्न अंग बने। राम मंदिर से राम राज्य और खंडित से अखंड भारत की ओर बढ़े।
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