अंधेरे में सेल्फी लेतीं छात्राएं।
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विद्यार्थियों की मायूसी: पहला दीक्षांत, लेकिन यादें अंधेरे में
इस बार दीक्षांत समारोह पहली बार विश्वविद्यालय परिसर से बाहर आयोजित किया गया। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर को समारोह स्थल इसलिए चुना गया कि विद्यार्थी एक विशिष्ट स्थल पर यादगार अनुभव के साथ पदक व उपाधि प्राप्त करें। कुलपति प्रो. एके त्यागी का कहना है कि इससे विश्वविद्यालय पर होने वाला खर्च भी कम हुआ और छात्रों को एक नई अनुभूति मिली। लेकिन कार्यक्रम के बाद जैसी बेतरतीब व्यवस्थाएं दिखीं, उससे छात्रों की खुशी क्षणभर में मायूसी में बदल गई।
हमने सोचा, शायद बिजली चली गई है... लेकिन पता चला, कटवा दी गई
एक स्वर्ण पदक प्राप्त छात्रा ने कहा, जब हम मंच के पास तस्वीर लेने पहुंचे तो अचानक अंधेरा हो गया। लगा कि बिजली चली गई है, लेकिन बाद में जब किसी ने बताया कि बिजली जानबूझकर कटवा दी गई है, तो बहुत दुख हुआ। क्या हम सिर्फ दीक्षांत तक ही सम्मानित हैं?
सवाल उठे: आयोजन सिर्फ वीआईपी उपस्थिति तक ही सीमित था?
छात्रों और शिक्षकों के बीच यह चर्चा आम रही कि क्या आयोजन केवल राज्यपाल की उपस्थिति तक ही सीमित था? जो विद्यार्थी अपने जीवन के सबसे गौरवशाली क्षण को संजोना चाहते थे, उन्हें बिजली के बिना मोबाइल के फ्लैश में तस्वीर लेनी पड़ी, वह भी बाहर निकाले जाने की जल्दबाजी में, एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।