राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने समाज में महिलाओं की 50 फासदी भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि काशी संतों, ऋषियों और गंगा की भूमि है। पवित्र भूमि पर पवित्र गाय, इसे आर्थिक आय का जरिया बनाएं।
समारोह को संबोधित करते हुए गुजरात के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और बनास डेयरी के अध्यक्ष शंकर भाई चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्पना को पूरा किया जा रहा है। मंगात्तिरी गायों के क्षेत्र में गुजरात की गीर गाय आ रही हैं। इस तरह से एक प्रदेश का दूसरे प्रदेश से जुड़ाव हो रहा है। बनास डेयरी ने दो साल में उस लाभांश को बनारस के दूध उत्पादक किसानों में भी वितरित किया है।
उन्होंने कहा कि अब बनास गुजरात से बनारस का यह रिश्ता गाय के माध्यम से जुड़ा है। सारा कार्यक्रम प्रधानमंत्री के निर्देशन पर हो रहा है। दुनिया की सबसे अच्छी गाय के बारे में शास्त्रों और वेदों में वर्णन किया गया है। इसकी खुराक दूध नहीं बल्कि अमृत है। विदेशों में इस गाय का शुद्ध देसी घी 5000 रुपये प्रति किलो बेचा जाता है।
अपने संबोधन में कहा कि यह गाय उत्तर प्रदेश की थी, जो भगवान कृष्ण के द्वारा मथुरा से गुजरात के द्वारका ले जाई गई थी। वहां पर इस गाय का संवर्धन हुआ और आज यह गाय गुजरात से काशी की भूमि पर फिर से आ रही है।
इस दौरान गुजरात जाकर गीर गाय पालन की जानकारी लेने वाली महिला अंबा श्रीनीलम ने अपने अनुभव राज्यपाल को सुनाएं। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी सुनील ओझा, भाजपा जिला अध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, जिला महामंत्री प्रवीण सिंह गौतम, बनास डेयरी के एमडी संग्राम चौधरी सहित भारी संख्या में किसान व भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पदाधिकारी उपस्थित थे।
18 किसानों को मिलीं गाय
इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 18 किसानों को गीर गाय सौंपी। 14 लोगों को मंच पर गीर गाय के प्रतीक चिह्न को प्रदान किया, जबकि 4 किसानों को गाय सौंपी। राज्यपाल ने यहां पर गीर गाय की पूजा भी की।