भारत सरकार ने पूर्वांचल लगायत पूरे देश के शिल्पियो को बड़ी राहत दी है। अब बिना किसी रोक टोक के 20 लाख रुपये तक का कारोबार व्यक्तिगत शिल्पी वार्षिक रूप से किसी भी राज्य में जा कर कर सकेगा। पूर्वांचल के शिल्पियों ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है।
वाराणसी लगायत पूरे पूर्वांचल के शिल्पी अपनी कलाकृति को बिना जीएसटी के किसी भी राज्य में ले जा सकते हैं। बनारस, दुनिया का सबसे बड़ा जीआई पंजीकृत हस्तशिल्प का केंद्र है।
लगभग 15 लाख लोग हस्तशिल्प से जुड़े हैं। इसके माध्यम से पूर्वांचल में 18500 करोड़ का वार्षिक कारोबार होता है जिसके चलते बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आती है।
राज्य के अंदर भी शिल्प के सामान ले जाने पर यह छूट है। शिल्पी के पास अपना आधारकार्ड, शिल्पी पहचानपत्र होना चाहिए। शिल्पियों को आने वाले समय में पैनकार्ड भी जरूरी होगा। ताकि बैंक से कारोबार में आसानी हो सके।
हस्तशिल्पी अनिल कसेरा, प्रेम शंकर विश्वकर्मा, रामेश्वर सिंह, बच्चेलाल मौर्या, जमालुद्दीन अंसारी, प्यारेलाल मौर्य, जीनत, नुशरत, अंशुया, रजिया, कैसरजहा, बलरामदास, तरुण सिंह, शिवानंद, सुदामा, किरण विश्वकर्मा, सुरेश कुमार, शोहित प्रजापति, पप्पू प्रजापति ने जीएसटी में शिल्पियों को राहत मिलने की सराहना की है।
हथकरघा एवं हस्तशिल्प, बनारस की परंपरा का हिस्सा रहा है जिसके कारण काशी प्राचीन काल से व्यावसायिक केंद्र के रूप में भी पूरी दुनिया में विख्यात रहा है। यहां की उत्कृष्ट हथकरघा तथा परंपरागत हस्तशिल्प आज भी आर्कषण का केंद्र है।
बनारस परिक्षेत्र एवं आसपास के जनपदों में लगभग 10 लाख लोग, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की तादाद है, लगभग 20 हजार करोड़ के कारोबार के साथ किसी न किसी पारंपरिक कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प एवं हथकरघा से जुड़कर कार्य करते हैं।
वर्तमान समय में इन उद्योगों पर विभिन्न कारणों से गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है तथा बुनकरों, शिल्पियों, कारीगरों का पलायन हो रहा है। इसको लेकर चिंता चल ही रही थी कि उसी दौरान जीएसटी लगने से इस उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।
विभिन्न शिल्प से जुड़े लोगों ने इसको लेकर पीएम, सीएम को पत्र लिखा था। आखिरकार सरकार ने उनकी सुन ली और बड़ी राहत दी है।