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छठ पूजा: तस्वीरें...गंगाजल से बनाया लौकी-भात, नहाय-खाय से डाला छठ शुरू; आज खरना के साथ होगा 36 घंटे का व्रत

Sun, 26 Oct 2025 01:09 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

नहाय-खाय के साथ छठ पूजा की शुरुआत हो चुकी है। काशी नगरी में नदी और सरोवर के किनारे वेदियां बनाकर मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है। सोमवार की शाम व्रती महिलाएं भगवान भास्कर की पूजा करेंगी।
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छठ पूजा के लिए वेदी बनाती महिलाएं। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
Varanasi News: सूर्यदेव की आराधना का चार दिनों तक चलने वाला महापर्व डाला छठ शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। घाटों पर पहुंची महिलाओं ने गंगा स्नानकर वेदी की पूजा की और दीप जलाया। चने के दाल, चावल और लौकी की सब्जी बनाकर ग्रहण किया। इसके साथ डाला छठ की शुरुआत हो गई। वह रविवार को खरना के साथ 36 घंटे के व्रत शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही घरों से लेकर मोहल्लों तक छठ मइया के गीत गुंजने लगे। 
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वरुणा पुल स्थित शास्त्री घाट की सजावट। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
महिलाओं और पुरुषों ने गंगा स्नान किया। इसके बाद घाटों पर बनी वेदियों पर विधिवत पूजा की। उन्होंने वेदी पर फूल माला चढ़ाकर सिंदूर चढ़ाया और दीप जलाए। सूर्य देव की पूजा कर आरती की। गंगाजल लेकर घर पहुंचीं। मिट्टी का चूल्हा तैयार किया। शाम को गंगाजल मिलाकर लौकी की सब्जी, चना का दाल और चावल बनाकर पूजा किया और फिर ग्रहण किया। 
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पूजा वाले स्थान पर गोबर और मिट्टी का लेपन करते युवा। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
रविवार को दिनभर खरना का व्रत रखेंगी। गंगा स्नान के बाद गंगाजल को मिलाकर ही खीर और रोटी बनाकर पूजा करेंगी और ग्रहण करेंगी। खरना के साथ 36 घंटे का व्रत शुरू हो जाएगा। 27 अक्तूबर को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देंगी और 28 को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण होगा।

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पहड़िया मंडी में खरीदारी करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
बाजार छोड़ पहड़िया मंडी से की खरीदारी, 40 फीसदी तक सस्ता
डाला छठ के लिए शनिवार को फलों की खरीदारी जोरों पर रही। इस बार विभिन्न तरह के फलों के दाम में तेजी को देखते हुए कई लोगों ने बाजारों के बजाय पहड़िया मंडी का रुख किया, जहां फुटकर में भी जमकर खरीदारी हुई। लोगों ने मोलभाव कर खरीदारी की। सुबह से देर शाम तक जबर्दस्त भीड़ रही। यहाँ उन्हें बाजार भाव से फल सस्ते मिले, जबकि शहर के बाजारों में कुछ फल दोगुने दाम पर बिके।
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ऊख की खरीदारी करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
छठ पूजा के लिए अब तक लोग दउरा, डलिया, सूप, लोटा-थाली और मेवे आदि की खरीदारी कर रहे थे। अब केवल दो दिन शेष हैं, इसलिए फलों की खरीदारी भी शुरू हो गई है। पहड़िया मंडी में पिछले चार दिनों से पूर्वांचल के अलावा बिहार के कारोबारी थोक में खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन शनिवार से फुटकर खरीद में भी तेजी देखी गई।
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भगवान भास्कर की पूजा करती महिलाएं। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
लोकमातृका षष्ठी की पहली पूजा की थी सूर्य ने
लोक आस्था का पर्व छठ पारिवारिक सुख-स्मृद्धि तथा मनोवांछित फलप्राप्ति के लिए मनाया जाता है। लोकपरंपरा के अनुसार सूर्य देव और छठी मैया का संबंध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी। त्रेतायुग में भगवान राम जब माता सीता से स्वयंवर करके घर लौटे थे और उनका राज्याभिषेक किया गया, उसके पश्चात उन्होंने पूरे विधान के साथ कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को पूरे परिवार के साथ यह पूजा की थी तभी से इस पूजा का महत्व है। 
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सूर्य सरोवर में बनाई गई वेदी। - फोटो : अमर उजाला
द्वापरयुग में जब पांडव ने अपना सर्वस्व गंवा दिया था, तब द्रौपदी ने इस व्रत का पालन किया। वर्षों तक इसे नियमित करने पर पांडवों को उनका सर्वस्व वापस मिला था। सनातन संस्था की प्राची जुवेकर ने बताया कि छठ पर्व की परंपरा में बहुत ही गहरा विज्ञान छिपा हुआ है, षष्ठी तिथि (छठ) एक विशेष खगोलीय अवसर है। 

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दीप जलाकर पूजन करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
उस समय सूर्य की पराबैगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र होती हैं। उसके संभावित कुप्रभावों से मानव की यथासंभव रक्षा करने का सामर्थ्य इस परंपरा में है। पर्वपालन से सूर्य (तारा) प्रकाश (पराबैगनी किरण) के हानिकारक प्रभाव से जीवों की रक्षा संभव है। 
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सूर्य सरोवर को झालरों से सजाया गया। - फोटो : अमर उजाला
सूर्य के प्रकाश के साथ उसकी पराबैगनी किरण भी चंद्रमा और पृथ्वीपर आती हैं। सूर्य का प्रकाश जब पृथ्वी पर पहुंचता है, तो पहले उसे वायुमंडल मिलता है। वायुमंडल में प्रवेश करने पर उसे आयन मंडल मिलता है। पराबैगनी किरणों का उपयोग कर वायुमंडल अपने ऑक्सीजन तत्व को संश्लेषित कर उसे उसके एलोट्रोप ओजोन में बदल देता है। 

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