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काशी विद्यापीठ: सफलता की कहानी मेधावियों की जुबानी, गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाने वाले हुनरमंदों ने बताया राज

Tue, 12 Dec 2023 05:15 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

काशी विद्यापीठ के मेधावियों ने कहा कि पढ़ाई के लिए सबका अपना-अपना तरीका होता है। कोई विद्यार्थी पढ़ाई को बहुत बोझ समझ कर या दबाव में कर रहा है तो निश्चय ही उसे सफलता उसके अनुकूल नहीं मिल पाएगी। 
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सफलता की कहानी मेधावियों की जुबानी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अधिकतर विद्यार्थी दिन-रात पढ़ाई में जुटे रहते हैं। फिर भी उन्हें मनचाही सफलता नहीं मिलती। लेकिन, एकाग्रचित होकर पांच से छह घंटे की पढ़ाई ही पर्याप्त है। ये कहना है कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मेधावियों का। उनका कहना है कि उन्होंने पढ़ाई को कभी बोझ नहीं माना और बिना दबाव के नियमित पढ़ाई की।
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पढ़ाई के लिए सबका अपना-अपना तरीका होता है। कोई विद्यार्थी पढ़ाई को बहुत बोझ समझ कर या दबाव में कर रहा है तो निश्चय ही उसे सफलता उसके अनुकूल नहीं मिल पाएगी। हां, अगर वह विषयों के अच्छी किताबों, शिक्षकों और सहपाठियों का सहयोग लेता है तो वह बेहतर कर सकते हैं। 

गोल्ड मेडलिस्ट मनीषा मौर्या ने बताया कि जो भी पढ़ें अच्छे से पढ़ें,। बहुत ज्यादा समय देने की जरूरत नहीं होती है। ज्यादा पढ़ने से समझना मुश्किल हो जाता है। संसृता सिंह का कहना है कि रेगुलर 5 से 6 घंटे ही पढ़ाई करती थी, मगर पढ़ी हुई चीजों का हमेशा दोहराती थी ताकि भूल न सके। नैना का कहना है साथियों के साथ पढ़ी हुई चीजों पर चर्चा जरूरी होती है। इससे कंफ्यूजन दूर हो जाता है।
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मेधावियों ने पढ़ाई में सफलता के ये अपनाए तरीके
  • नियमित क्लास, जो भी समझ में ना आए उसे शिक्षक से समझने का प्रयास किया।
  • अच्छी बुक को पढ़ें और उस से नोट्स बनाएं, पिछले सालों की पेपर को देखें और उत्तर लिखने का अभ्यास करें।
  • जो पढ़े उसे अपने सहपाठियों के साथ चर्चा की, ताकि कोई कंफ्यूजन न रह जाए
  • ज्यादा पढ़ने की बजाय नियमित 5 से 6 घंटे पढ़ाई की। परीक्षा के समय दो घंटे बढ़ा दी। परीक्षा के समय नई चीजों को पढ़ने से बचे। क्योंकि इससे कन्फ्यूजन की स्थिति बनी रहती है।
  • पिछले सालों के भी बुक को देखे, कुछ चीज नेट से भी समझे।
  • तनाव हावी न हो, इसलिए गीत आदि सुनना चाहिए। इससे मनोरंजन के साथ पढ़ाई में उत्साह बना रहता है।
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