वाराणसी पुलिस चूक न करती तो गिरफ्त में होता गिरधारी
बुलेटप्रूफ वाहनों में चलने वालों की हत्या के लिए गिरधारी बनारस से लेकर लखनऊ तक कुख्यात हो गया है। मऊ जिले का पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह भी बुलेटप्रूफ वाहन से चलता था। इससे पहले 30 सितंबर 2019 को वाराणसी के सदर तहसील परिसर में बुलेटप्रूफ वाहन में बैठने जा रहे असलाहधारी सारनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर नीतेश सिंह उर्फ बबलू पर अंधाधुंध फायरिंग कर दिनदहाड़े हत्या की गई थी।
वारदात के तीन दिन बाद तत्कालीन क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह ने तफ्तीश कर गिरधारी को चिह्नित किया और उसकी धरपकड़ का प्रयास शुरू किया। इसी बीच सफेदपोशों का ऐसा दबाव पड़ा कि विक्रम सिंह का ट्रांसफर प्रशासनिक आधार पर मैनपुरी कर दिया गया। वारदात के आठ महीने बाद वाराणसी पुलिस ने ही नीतेश की हत्या का आरोपी बताते हुए उस पर 50 हजार का इनाम घोषित किया।
फिर एडीजी जोन ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया। अजीत सिंह की हत्या के बाद बनारस, मऊ, आजमगढ़ से लेकर लखनऊ तक यही चर्चा रही कि नीतेश की हत्या के बाद यदि गिरधारी को पुलिस ने प्रयास कर पकड़ लिया होता तो वह आज इतनी बड़ी चुनौती न बना होता।
अजीत सिंह (बायें) व घटनास्थल पर तैनात पुलिसकर्मी।
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ब्लाक प्रमुख बनना चाहता है गिरधारी, कुंटू को एमएलसी बनना है उसके सहारे
चोलापुर क्षेत्र के लखनपुर का मूल निवासी गिरधारी मऊ के मोहम्मदाबादगोहना क्षेत्र के भदीड़ में एक अरसे से मकान बनवा रखा है। गिरधारी उस क्षेत्र में अप्रत्यक्ष तरीके से दूसरों के सहारे अक्सर सार्वजनिक आयोजन कर लोगों की मदद करता रहता है। उसकी इच्छा यही है कि वह या उसके परिवार का कोई सदस्य एक बार वहां से ब्लाक प्रमुख बन जाए।
उसके ब्लाक प्रमुख बनने की राह में अजीत सिंह एक बड़ी बाधा था। वहीं, गिरधारी का सबसे बड़ा सहयोगी और जेल में बंद 70 से ज्यादा मुकदमों का आरोपी ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू की चाहत एमएलसी बनने की है। ऐसे में दोनों ही अपनी महत्वाकांक्षा को अंजाम तक पहुंचाने के लिए एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं।