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मिलेगी सौगात, इंतजार में काशी

Wed, 24 Feb 2016 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
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पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के साथ ही रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के वाराणसी से सटे गाजीपुर के होने के नाते भी लोगों को उम्मीद है कि अबकी बजट में भी वाराणसी समेत पूर्वांचल कुछ खास जरूर होगा। चर्चाओं में वाराणसी से दक्षिण भारत और मुंबई के लिए नई ट्रेनों की दरकार है तो वहीं यात्री किराए में कमी और सुविधाओं में नए प्रयोग पर भी लोगों की नजरें टिकी हैं।
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मोदी सरकार बनने के बाद से वाराणसी कैंट हो या मंडुवाडीह, रेलवे स्टेशनों पर आए बदलावों को हर कोई स्वीकार कर रहा है। स्वच्छता और नई ट्रेनों के साथ ही यात्री सुविधाएं भी बढ़ी हैं। बावजूद इसके दक्षिण भारत और मुंबई के लिए ट्रेनों की जरूरत अभी पूरी नही हो सकी है। जबकि, पिछले एक महीने के अंदर वाराणसी से नई दिल्ली के लिए देश की पहली मॉडल ट्रेन महामना एक्सप्रेस के अलावा मुगलसराय से वाराणसी होकर आने-जाने वाली साप्ताहिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा चुकी है। अब लोगों को इंतजार से राजधानी से काशी के जुड़ने की है। वाराणसी से लखनऊ के लिए सुपरफास्ट ट्रेन की भी सौगात मिल सकती है।


कुछ दिनों पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने मंडुवाडीह से संचालित होने वाली ट्रेनों में मंडुवाडीह के साथ ही बनारस या काशी लिखवाने की बात कही थी। इस रेल बजट में मंडुवाडीह स्टेशन के नाम में बनारस या कुछ ऐसा जोड़ा जा सकता है जिसे पढ़ते ही यात्रियों को आसानी से समझ आ जाएगा कि यह ट्रेन बनारस से आ या जा रही है।
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व्यापारियों व उद्यमियों की मांग को इस रेल बजट में जगह मिल सकती है। वाराणसी से लखनऊ के बीच शताब्दी चलाने की मांग की जा रही है। वहीं एक वातानुकूलित चेयरकार भी चलाने की वर्षों से मांग की जा रही है।



मुंबई के लिए जाने वाली ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ हो रही है। आए दिन लोग ट्रेनों में बैठने के चक्कर में घायल या जान तक गंवा देते हैं। मुंबई के लिए जनसाधारण ट्रेन लोगों को खासा राहत पहुंचा सकती है। वहीं दक्षिण भारत से बड़ी संख्या में पर्यटक काशी आते हैं। बावजूद इसके दक्षिण भारत के कई महत्वपूर्ण हिस्से अब भी काशी से रेल मार्ग के माध्यम से नही जुड़ सके हैं।



प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने की वजह से बनारस पर रेलवे खासा मेहरबान है। बजट में घोषित ट्रेनों की सौगात तो मिली ही कुछ ऐसी भी ट्रेने मिली जिसकी कल्पना भी यहां के लोगों ने नही की थी। महामना एक्सप्रेस वाराणसी से चलाई गई तो वहीं कैंट रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में भी कई कार्य हुए। अभी कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं।


वाराणसी से मुंबई के बीच दुरंतो चलने की पूरी संभावना है। रेल सूत्रों की मानें तो प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। मुंबई के लिए एक्सप्रेस ट्रेने है पर यात्रियों को एक सीट के लिए जमकर मशक्कत करनी पड़ती है। रेल बजट में दुरंतो की घोषणा हो सकती है।
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