पीएम मोदी की गाजीपुर सभा के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के एक कांस्टेबल को धरने पर बैठे लोगों को समझाना भारी पड़ गया। धरना दे रहे लोगों ने कांस्टेबल की पीट-पीटकर जान ले ली और अन्य पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया। वहीं प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए।
पत्थरबाजी की घटना में गाजीपुर में शहीद हुए मृतक कांस्टेबल सुरेश वत्स के बेटे वीपी सिंह ने कहा कि पुलिस अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रही है। हम उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं? अब हम मुआवजे के साथ क्या करेंगे? इससे पहले बुलंदशहर और प्रतापगढ़ में इसी तरह की घटनाएं हुई थीं।
इस घटना के बाद गाजीपुर के सीओ सिटी एमपी पाठक ने बताया कि मामले में 32 लोगों को नामजद किया गया है जबकि 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर लिखी गई है। मामले की तफ्तीश जारी है।
डीएम के बालाजी ने बताया कि आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। अन्य को चिह्नित किया जा रहा है। गिरफ्तारी के लिए टीम बना दी गई है। सीएम योगी ने मामले को संज्ञान में लिया है। सीएम ने पुलिसकर्मी के परिजनों को 40 लाख रुपए देने की घोषणा की है।
ज्ञात हो कि आरक्षण की मांग को लेकर निषाद पार्टी के लोग सरजू पांडेय पार्क में शनिवार को धरना-प्रदर्शन करने वाले थे, लेकिन प्रशासन ने पीएम मोदी के कार्यक्रम के चलते अनुमति नहीं दी थी। अशांति फैलाने की आशंका पर पुलिस ने निषाद पार्टी के एक नेता को हिरासत में भी लिया था। इससे नाराज पार्टी के लोगों ने कठवामोड़ पुलिया के किनारे धरना-प्रदर्शन करने के साथ जाम लगा दिया था।
एडीजी वाराणसी जोन पीवी रामा शास्त्री ने कहा कि गाजीपुर में हुए पथराव व पुलिस कांस्टेबल की मौत मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सीएमओ के अनुसार, कांस्टेबल की मौत का कारण सिर में लगी चोट है। हम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।