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संस्कृत विश्वविद्यालय: जर्मन स्टार्च से होगा पांडुलिपियों का संरक्षण, 200 साल तक बढ़ जाएगी उम्र

Tue, 09 Nov 2021 01:21 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के सरस्वती भवन पुस्तकालय की एक लाख 11 हजार 132 पांडुलिपियों का जिल्द बदला जाएगा। प्रथम चरण में अलग-अलग पन्नों में पांडुलिपियों को गेहूं के पेस्ट (जर्मन स्टार्च) से जोड़ा जा रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के सरस्वती भवन पुस्तकालय की पांडुलिपियों का संरक्षण किया जा रहा है। संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठानम के विशेषज्ञों ने पांडुलिपियों की जिल्द बदलने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया के तहत पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की संरक्षित एक लाख 11 हजार 132 पांडुलिपियों के जिल्द को बदला जाएगा।

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प्रथम चरण में अलग-अलग पन्नों में पांडुलिपियों को गेहूं के पेस्ट (जर्मन स्टार्च) से जोड़ा जा रहा है। प्रतिष्ठानम के विशेषज्ञों ने बताया कि जर्मनी स्टार्च की लाइफ करीब 200 साल से अधिक बताई जा रही है। स्टार्च के जोड़ से पांडुलिपियों के पन्नों में दीमक व अन्य कीटाणु लगने की संभावना भी खत्म हो जाती है।

स्टार्च की खासियत है कि पन्ने को आसानी से खोला जा सकता है। वहीं पांडुलिपियों के छिद्र को भरने के लिए विशेष प्रकार के टिश्यू पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रतिष्ठानम की टीम ने संरक्षण के लिए तीन तरह की पांडुलिपियों को चिह्नित किया है। पहला जो ठीक-ठाक है। केवल उसे साफ करने की जरूरत है।
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दूसरा वह जिसमें नमी के कारण फंगस लग गए हैं। तीसरा जो ज्यादा खराब स्थिति में है। तीनों तरह की पांडुलिपियों का ट्रीटमेंट अलग-अलग तरह से किया जाएगा। विशेषज्ञों का दावा है कि वर्तमान में चल रहे ट्रीटमेंट से पांडुलिपियों की लाइफ कम से कम 200 साल और बढ़ जाएंगी।

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