वे तीनों बिहार के रहने वाले थे और मजदूरी के लिए बाहर गए थे। लॉक डाउन में काम बंद होने के कारण बार्डर तक पहुंच गए थे, लेकिन अब फंसे हुए हैं। तब रामबली, सोनू व कामेश्वर ने उन्हें अपनी नाव से गंगा के उस पार पहुंचा दिया, लेकिन उन्हें ऐसा करते हुए गांव के कुछ लोगों ने उन्हें देख लिया।
ऐसे में जब वे तीनों को गंगा पार उतार कर लौटे तो गांव वालों ने उनके गांव में प्रवेश पर रोक लगा दी। ग्रामीणों का कहना था कि चूंकि ये तीनों लोग बाहरी व्यक्तियों के संपर्क में आए हैं। नाव से उन्हें गंगा पार कराते समय यदि वे तीनों संक्रमित हुए तो इनके भी कोरोना वायरस की चपेट में आने की संभावना है, इसलिए अब इन्हें गांव में प्रवेश तभी मिलेगा जब ये 14 दिन तक गांव के बाहर बने उच्च प्राथमिक विद्यालय में रह लेंगे।
इस दौरान यदि ये संक्रमित हुए तो वह सबके सामने आ जाएगा। हालांकि अभी तीनों को ग्राम प्रधान या वीडीओ की तरफ से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। विद्यालय का ताला भी नहीं खुला है और ये बरामदे ही रह रहे हैं, इस दौरान इनके परिवार वालों की तरफ से ही भोजन आदि की व्यवस्था की जा रही है।