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गंगा में प्रदूषण हुआ कम, ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी

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वाराणसी। मोक्षदायिनी गंगा के प्रदूषण के स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। काशी में गंगा का पानी न सिर्फ साफ हुआ है बल्कि उसमें आक्सीजन की मात्रा भी बढ़ गई है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा पिछले महीने लिए गए आंकड़ों के अनुसार गंगा में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी है। बरसात के बाद पहली बार ऐसा है जो गंगा में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है। इसके पहले लॉकडाउन में गंगाजल की गुणवत्ता में सुधार हुआ था।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जो गंगाजल का सैंपल लिया था उसके आंकड़ों ने जल विज्ञानियों में उत्साह भर दिया है। क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि 12 अक्तूबर को गंगा में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा 6.8 मिलीग्राम प्रति लीटर था। 11 नवंबर को गंगाजल के नमूनों की जांच में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा 8.6 मिलीग्राम प्रतिलीटर हो गई है। इसके पीछे गंगा में प्रदूषक तत्वों का कम होना है। गंगा में सीवेज गिरने की मात्रा में भारी कमी आई है। बरसात के दौरान गंगा में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा 6 मिलीग्राम प्रतिलीटर दर्ज की गई थी। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के किनारे चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का असर अब नजर आ रहा है। गंगा में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा बढ़ने से जलीय जीव जंतुओं की संख्या भी बढ़ेगी।
घुलनशील आक्सीजन की मात्रा जलीय जीवों के लिए बेहतर
छह मार्च को लिए गए गंगा जल के आंकड़ों में नगवां नाले के पास घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा 3.8 और तुलसीघाट पर 6.8 मिलीग्राम प्रतिलीटर थी। वहीं लॉकडाउन के बाद चार अप्रैल को नगवां नाले के पास घुलनशील ऑक्सीजन 6.8 और तुलसीघाट पर 7.2 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई। गंगा में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा पांच मिलीग्राम प्रति लीटर अच्छा माना जाता है। किसी नदी झील या तालाब में डिजाल्वड आक्सीजन की मात्रा से वहां के पानी की गुणवत्ता की जांच की जाती है। बेहतर डिजाल्व्ड आक्सीजन वाला पानी जलीय जीव जंतुओं के लिए बेहतर माना जाता है।
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गंगा में है प्राकृतिक क्लिनजिंग मैकेनिज्म
संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि गंगा के पानी में प्राकृतिक क्लिनजिंग मैकेनिज्म है। घुलनशील आक्सीजन बढ़ने से जलीय जीवों की संख्या बढ़ेगी। इससे पता चला है कि केमिकल एलीमेंट और सीवेज सिस्टम को बंद कर दें तो गंगा शतप्रतिशत साफ हो जाएगी।
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