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सूदखोरों से त्रस्त व्यापारी ने गंगा में छलांग लगाई

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वाराणसी। सूदखोरों के उत्पीड़न से आजिज आकर शुक्रवार को व्यापारी सुनील उपाध्याय (42) ने शास्त्री पुल से गंगा में छलांग लगा दी। सूचना पाकर रामनगर और लंका थाने की पुलिस सीमा विवाद में उलझ गई। शास्त्री पुल पर रखे सुनील के कपड़े से बरामद कागज के आधार पर लंका थाने में आलोक त्यागी, अमित सिंह और विनोद गुप्ता के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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लंका थाना अंतर्गत चितईपुर क्षेत्र की विश्वकर्मा नगर कॉलोनी निवासी सुनील उपाध्याय सेकेंड हैंड वाहन खरीद कर बेचते थे। इसके अलावा वह टूर एंड ट्रेवल्स का काम करते थे। दोपहर तीन बजे के लगभग सुनील अपने एक दोस्त के साथ सामने घाट स्थित शास्त्री पुल पर पहुंचे। पुल पर ही उन्होंने अपना कपड़ा उतार कर रखा और टहलने लगे। इसी बीच सुनील ने गंगा में छलांग लगा दी तो उनका दोस्त शोर मचाते हुए दौड़ा और पुलिस को सूचना दिया। सूचना पाकर लंका और रामनगर थाने की पुलिस पहुंची। रामनगर पुलिस अपने सीमा क्षेत्र के बाहर का मामला बताते हुए वापस लौैट गई। लंका पुलिस ने गोताखोरों की मदद से खोजबीन शुरू की, लेकिन पता नहीं चल पाया। पुलिस की सूचना पर सुनील की पत्नी सीमा उपाध्याय लंका थाने पहुंची। परिजनों के अनुसार सुनील रिश्ते में बीएचयू के पूर्व एमएस डॉ. ओपी उपाध्याय का भतीजा लगता था। उधर, लंका इंस्पेक्टर भारत भूषण तिवारी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीम लगाई गई है।
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तीन सूदखोरों के कारण आत्महत्या कर रहा हूं
सुनील ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं तीन सूदखोरों के कारण आत्महत्या कर रहा हूं। आलोेक त्यागी हर महीने 40 प्रतिशत ब्याज लेता था। चार लाख की जगह 40 लाख दे चुका हूं, लेकिन कर्ज नहीं खत्म हो रहा है। चितईपुर के अमित सिंह का कुछ पैसा बाकी है, उसके लिए वह रोजाना परेशान करता है। महमूरगंज के विनोद गुप्ता का मैं ब्याज दे रहा था। इधर नहीं दे पाया तो चोरी और छेड़खानी के मुकदमे में फंसाने की धमकी देता था। तीनों से मैं परेशान हो गया हूं और इनसे हमारे परिवार की रक्षा की जाए।
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शहर में सूदखोरों के आतंक से पहले भी हुई हैं मौतें
बनारस में सूदखोरों का नेटवर्क काफी लंबा है और इनसे आजिज आकर कई लोग जान दे चुके हैं। ठेला-पटरी दुकानदारों के अलावा कई सरकारी विभागों के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी सूदखोरों के चंगुल में फंसे हुए हैं। सरकारी कर्मचारियों से सूदखोर उनकी पासबुक जमा करा लेते हैं तो आमजन से जमीन या मकान के कागजात गिरवी रखवाए जाते हैं। कर्ज लेने वाले की जरूरत को देखते हुए ब्याज दर 10 से 40 प्रतिशत के बीच निर्धारित की जाती है। दबाव इस तरह से बनाया जाता है कि कर्ज लेने वाला ब्याज न चुका पाए और अपना मकान या जमीन सूदखोर कोे दे दे।
अक्तूबर 2015 में हुकुलगंज निवासी पान के थोक व्यवसायी मुरलीधर ने सूदखोरों से आजिज आकर राजघाट पुल से गंगा में छलांग लगा कर जान दे दी थी। लगभग 10 साल पहले रवींद्रपुरी में एक सूदखोर ने ब्याज के रुपये न मिलने पर कैटरर की हत्या कर दी थी। इससे पहले सूदखोरों ने पैसा वापस न मिलने पर नगर निगम के एक कर्मचारी को पीट-पीट कर मार डाला था। 2009 में सूदखोरों से परेशान होकर सिगरा क्षेत्र में एक महिला आत्महत्या कर ली थी। इसी तरह हुकुलगंज में सूदखोरों से परेशान होकर एक महिला अपने चार साल के बेटे के साथ आग लगा कर जान दे दी थी। सूदखोरों के चंगुल में मौजूदा समय में भी कई लोग फंसे हुए हैं, लेकिन उनके आतंक से कर्ज लेने वाले शिकायत लेकर पुलिस के पास नहीं जाते हैं।
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