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गंगा पुष्कर कुंभ: 12 दिन में 11 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया अनुष्ठान, गंगा स्नान और आरती के साथ समापन

Wed, 03 May 2023 09:35 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

गंगा पुष्कर कुंभ का शुभारंभ 22 अप्रैल को हुआ था। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान किए और काशी के मंदिरों की परिक्रमा की। 12 दिन में 11 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान किए। 
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केदारघाट पर सजी सांस्कृतिक संध्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मां गंगा की आरती और बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ ही वाराणसी में गंगा पुष्कर कुंभ की पूर्णाहुति बुधवार को हो गई। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान किए और काशी के मंदिरों की परिक्रमा की। 12 दिन में 11 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान किए। अस्सी से दशाश्वमेध घाट के बीच एक लाख से अधिक दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान किया।

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बुधवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही गंगा के तट पर गंगा पुष्कर कुंभ के अनुष्ठान आरंभ हुए। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद, पुरखों का तर्पण कर पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया। अंतिम दिन होने के कारण घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा रही। गंगा तट पर अनुष्ठान के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ शहर के मंदिरों की ओर मुड़ चली।

श्री काशी विश्वनाथ, मां विशालाक्षी, कालभैरव, बिंदुमाधव, संकटमोचन और दुर्गाकुंड मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कौड़िया माता के मंदिर में कौड़ी भी चढ़ाई। चेन्नई-हैदराबाद से आए तीर्थ पुरोहित कर्मकांड पूर्ण कराकर काशी से रवाना हो गए। शाम को गंगा आरती के साथ गंगा पुष्कर कुंभ महोत्सव का समापन हो गया।
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गंगा पुष्कर कुंभ की मान्यता

गंगा पुष्कर कुंभ - फोटो : अमर उजाला
12 दिवसीय इस महाकुंभ का शुभारंभ 22 अप्रैल को हुआ था। हनुमान घाट के वेंकटरमण घनपाठी ने बताया कि हर 12 साल पर नदियों के किनारे होने वाले इस आयोजन ने काशी से तेलुगु का नाता गहरा किया है। 12 दिनों तक स्नान करने से तीन करोड़ पचास लाख तीर्थों की यात्रा का फल प्राप्त होता है।

गंगा पुष्कर कुंभ - फोटो : अमर उजाला
विधान का पालन करने वालों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। डीएवी पीजी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप कुमार मिश्र ने बताया कि काशी तमिल संगमम के बाद काशी तेलुगु संगमम ने उत्तर और दक्षिण के रिश्ते को और मजबूत किया है। 12 दिनों तक चलने वाले आयोजन ने काशी के हर वर्ग को लाभान्वित किया है।
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महोत्सव के अंतिम दिन सांस्कृतिक संध्या

श्री चिंतामणि गणेश मंदिर की ओर से गंगा पुष्कर कुंभ महोत्सव के अंतिम दिन केदार घाट पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। कलाकारों ने भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी के साथ ही मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। महंत चल्लासुब्बाराव शास्त्री ने कलाकारों को आशीर्वाद दिया।
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