12 दिवसीय इस महाकुंभ का शुभारंभ 22 अप्रैल को हुआ था। हनुमान घाट के वेंकटरमण घनपाठी ने बताया कि हर 12 साल पर नदियों के किनारे होने वाले इस आयोजन ने काशी से तेलुगु का नाता गहरा किया है। 12 दिनों तक स्नान करने से तीन करोड़ पचास लाख तीर्थों की यात्रा का फल प्राप्त होता है।
विधान का पालन करने वालों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। डीएवी पीजी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप कुमार मिश्र ने बताया कि काशी तमिल संगमम के बाद काशी तेलुगु संगमम ने उत्तर और दक्षिण के रिश्ते को और मजबूत किया है। 12 दिनों तक चलने वाले आयोजन ने काशी के हर वर्ग को लाभान्वित किया है।
श्री चिंतामणि गणेश मंदिर की ओर से गंगा पुष्कर कुंभ महोत्सव के अंतिम दिन केदार घाट पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। कलाकारों ने भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी के साथ ही मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। महंत चल्लासुब्बाराव शास्त्री ने कलाकारों को आशीर्वाद दिया।