भारत सरकार ने 5 अक्तूबर 2009 को गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है। ऐसे ही अक्तूबर 2023 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा डॉल्फिन को राज्य जलीय जीव घोषित किया है।
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कैथी में सबसे अधिक और नारायणपुर में सबसे कम बचीं डॉल्फिन
काशी में मौजूदा समय में गंगा डॉल्फिन की संख्या 100 भी नहीं है। डॉल्फिन संरक्षक नागेंद्र निषाद ने बताया कि गंगा में पहले बहुत सारी डॉल्फिन थीं। प्रदूषण व पूरी खुराक न मिलने के कारण इन्होंने ठिकाना बदल दिया है। मौजूदा समय में कैथी में करीब 50 व नारायणपुर कैनाल के पास 12 के आस-पास डॉल्फिन बची हैं।
गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन एक बुद्धिमान, सामाजिक और चंचल समुद्री स्तनधारी जीव हैं। ये जीव इंसानों की तरह बच्चे पैदा करते हैं। ये सांस लेने के लिए सतह पर आती हैं। ध्वनि तरंगों (इकोलोकेशन) का उपयोग करती हैं। गंगा में चलने वाली मोटर से तरंगों में कंपन होता है। इससे ये डर जाती हैं। इस कारण भी इन मछलियों ने अपना रुख शांति की ओर किया है।
क्या बोले अधिकारी
गंगा में बढ़ते प्रदूषण और मोटर बोट की बढ़ती संख्या डॉल्फिन के लिए खतरा है। इनको जीवनयापन के लिए शांत माहौल और साफ पानी की आवश्यकता होती है। इनके संरक्षण के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। -दर्शन निषाद, डॉल्फिन संरक्षक
डॉल्फिन संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत काम किया जा रहा है। कैथी व नारायणपुर के आसपास अभी इनकी मौजूदगी है। इनके संरक्षण का लगातार प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही अभियान भी चलेगा। -स्वाती श्रीवास्तव, प्रभागीय वनाधिकारी