जगद्गुरु शंकराचार्य की प्रेरणा से वर्ष 1998 से निर्जला एकादशी पर कलश यात्रा का आयोजन कराया जा रहा है। श्री राजेन्द्र प्रसाद घाट से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक कलश-यात्रा निकाली जाती है। सुप्रभातम संस्था के स्व. दीनदयाल जालान, स्व. राजकिशोर गुप्त एवं संस्था के अन्य सहयोगियों द्वारा विगत 23 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है।
श्री काशी विश्वनाथ कलश -यात्रा लक्खी मेले का रूप ले चुकी है। भारत की सभी पवित्र नदियां, मॉरीशस के शिव सरोवर, नेपाल की बागमती नदी एवं चित्रकूट के पवित्र कूप के जल से भगवान का जलाभिषेक किया जा चुका है।
करोड़ो हिंदुओं के आस्था के प्रतीक भारत के विभिन्न अंचलों में स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ, श्री श्री शैलम, श्री रामेश्वरम, श्री पति वैद्यनाथ, श्री त्रयम्बकेश्वर, श्री ओंकारेश्वर, श्री महाकालेश्वर, श्री केदारनाथ, श्री घृणेश्वर, श्री नागेश्वर, श्री भीमाशंकर जी के अलावा आंडा नागनाथ एवं श्री बैजनाथ धाम के मुख्य पुजारी अपने सहयोगियों के साथ कलश यात्रा की अध्यक्षता कर चुके हैं।
गंगा दशहरा (20 जून) पर वाराणसी प्रशासन की ओर से गंगा घाट जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। साप्ताहिक बंदी और कोरोना महामारी को देखते हुए धर्माचार्यों और विद्वतजनों ने भी लोगों से घर पर रहकर ही मां गंगा का पूजन करने की अपील की है। गंगा दशहरा को काशी में दशाश्वमेध घाट पर स्नान की मान्यता है।
इस दिन हजारों की संख्या में लोग मां गंगा में डुबकी लगाकर अपने पापों के शमन की कामना करते हैं। साप्ताहिक बंदी होने के कारण गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं दिया जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में गंगा घाट पर भीड़ न लगाएं। वीकेंड लॉकडाउन का पालन करते हुए घर पर रहकर ही प्रतीकात्मक स्वरूप में गंगा दशहरा मनाएं।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने काशी की जनता से अपील की है कि वह प्रशासन का साथ दें। लॉकडाउन का पालन करें और गंगा स्नान के लिए घाटों पर ना जाएं। अन्नपूर्णा मंदिर के उपमहंत शंकर पुरी ने भी आम श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा है कि वह कोरोना संक्रमण काल के प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करें। प्रशासन की ओर से गंगा घाट पर गंगा दशहरा के दिन प्रतिबंध होने के कारण घरों से ही मां गंगा का ध्यान व पूजन करें।