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सड़क पर गंगा : चेतावनी बिंदु पार करने को तैयार जलस्तर, सलारपुर में 50 मकानों में घुसा पानी; पलायन भी शुरू

Sun, 23 Aug 2026 04:28 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में गंगा का जलस्तर 69.21 मीटर पहुंच गया है और चेतावनी बिंदु पार करने की स्थिति बन रही है। जलस्तर बढ़ने से सलारपुर में करीब 50 मकानों में पानी घुस गया। गंगा के साथ वरुणा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई स्थानों पर आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
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गंगा की बाढ़ में डूब रहे मंदिर-शिवालय। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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गंगा ने दिन पर दिन काशी में रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। शनिवार को गंगा का पानी अस्सी घाट जाने वाले मार्ग तक आ गया है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस कार्यालय, शीतला घाट पर शीतला मंदिर, मणिकर्णिका घाट, नमो घाट पर नमस्ते स्कल्पचर आधा डूब गया है। 

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वहीं, वरुणा में उफान के कारण सलारपुर क्षेत्र में 50 मकानों में पानी घुस गया। शनिवार को गंगा का जलस्तर 69.21 मीटर दर्ज किया गया। जो चेतावनी बिंदु से महज 1.05 मीटर है। लगातार गंगा में बढ़ते जल के कारण सहायक नदिया भी उफान पर हैं।  नदी किनारे रहने वालों को अपना घर छोड़ परिवार जानवरों व जरूरी सामानों के साथ ऊंचे स्थानों पे पहुंच रहे है। 

गंगा के पलट प्रवाह से सारनाथ क्षेत्र के पुलकोहना, सलारपुर, डिपो, दीनदयालपुर, नक्खी घाट के मोहल्ले पानी के चपेट में आ गए हैं। सलारपुर डिपो वाले नदी किनारे वाले मकान बना कर रहने वाले ज्ञायंती देवी, परमिला, लालू, रामधनी, सोनू, डब्लू, रत्न, चंदा, बबीता, सन्नी सहित 50 परिवार अपने घरों को छोड़ डिपो के ऊपर पालतू जानवरों के साथ तिरपाल लगा कर रहने पर मजबूर हैं। 

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अकसर बाढ़ आने से सलारपुर प्राथमिक विद्यालय में अस्थायी बाढ़ राहत शिविर जिला प्रशासन की ओर से संचालित किया जाता था जिसमें खाना, बिजली, दवा का व्यवस्था होती थी। इस बार प्रशासन ने व्यवस्था नहीं की है। दशाश्वमेध घाट पर बाढ़ के पानी ने सिर्फ घाट की सीढ़ियों और धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित नहीं किया है, बल्कि आसपास रोजी-रोटी चलाने वाले छोटे दुकानदारों और होटल कारोबारियों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। 

चौबेपुर। नाद व गोमती नदी में भी पानी का फैलाव धीरे-धीरे खेतों की ओर शुरू हो गया है। गंगा में लगातार बढ़ोतरी के चलते कैथी मार्कंडेय महादेव गंगा घाट की सीढि़यों पर पानी पहुंच गया। ढकना गौरीशंकर महादेव घाट, चंद्रावती जैन मंदिर घाट पर पानी लगातार बढ़ रहा है। गौरा उपरवार में पानी बढ़ोतरी के चलते किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।

दशाश्वमेध घाट पर गंगा का पानी बढ़ते ही सबसे पहले दुकान खाली करनी पड़ती हैं। सामान को सुरक्षित जगह पहुंचाने में काफी खर्च और मेहनत लगती है। रोज की कमाई पूरी तरह रुक जाती है। बाढ़ उतरने के बाद भी  गंदगी साफ करने में कई दिन लगते हैं। - विष्णु यादव, पूजा सामग्री दुकानदार, दशाश्वमेध घाट 

घाट पर पानी बढ़ने के बाद ग्राहक आना लगभग बंद हो जाते हैं। दुकान में रखा सामान भी खराब होने का डर रहता है। रोज कमाकर घर चलाने वालों के लिए दो-चार दिन की बंदी भी बड़ी परेशानी बन जाती है। - विवेक दुबे, चाय-नाश्ते की दुकान संचालक, दशाश्वमेध घाट

बाढ़ का पानी बढ़ते ही श्रद्धालुओं की आवाजाही कम हो जाती है। फूल, माला और प्रसाद जैसी चीजें ज्यादा देर तक नहीं रखी जा सकतीं, इसलिए सामान खराब होने का नुकसान अलग होता है। - दीपचंद मोदनवाल, फूल-माला और प्रसाद विक्रेता,  दशाश्वमेध घाट

पानी बढ़ने पर दुकान का सामान सुरक्षित जगह ले जाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। कई बार दुकान का फर्नीचर, लकड़ी और दूसरा सामान पानी में खराब हो जाता है। बाढ़ उतरने के बाद मरम्मत में भी पैसा लगाना पड़ता है। - इशू रस्तोगी, दुकानदार, दशाश्वमेध घाट
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केंद्रीय जल आयोग का शनिवार का आंकड़ा
  • नदी का नाम - गंगा 
  • गॉज साइट - राजघाट 
  • वर्तमान जलस्तर - 69.21 मीटर
  • चेतावनी बिंदु - 70.26 मीटर
  • खतरे का निशान - 71.26 मीटर
  • हाई फ्लड लेवल - 73.90 मीटर
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