पहाड़ों पर भारी वर्षा के चलते गंगा, गोमती समेत अन्य सहायक नदियों में भारी उफान आने की आशंका है। काशी में शुक्रवार को गंगा ने चालू सीजन का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। शाम सात बजे तक जलस्तर 67.76 मीटर पर पहुंच गया। गंगा दो सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही हैं। इस बढ़ाव से तटीय बस्तियों में दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। घाटों पर अंतिम संस्कार और दैनिक गंगा आरती पर असर पड़ा है। गंगा में नावों का संचालन रोक दिया गया है।
उधर, केंद्रीय जल आयोग ने पहाड़ों पर हुई भारी वर्षा को देखते हुए गंगा और उसकी सहायक नदियों में बाढ़ आने की चेतावनी जारी कर दी है। आशंका जताई गई है कि गंगा, गोमती समेत अन्य नदियां 18 जुलाई तक खतरे के निशान को पार कर सकती हैं।
11 जुलाई की दोपहर 67.65 मीटर पर पहुंचने के बाद गंगा स्थिर हो गई थी लेकिन गुरुवार से फिर बढ़ाव शुरू हो गया। इससे एक बार फिर तटीय जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार छतों पर होने लगा है, वहीं हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में चिताएं लगाई जाने लगी हैं। देर रात मां शीतला के गर्भगृह में गंगा लहराने से अब मां का मुखौटा अहिलेश्वर महादेव मंदिर में ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी रफ्तार से जलस्तर बढ़ता रहा तो शनिवार की सुबह तक सुबह-ए-बनारस के मंच तक पानी आ जाएगा।